Paarth : Ritu Dixit

“पार्थ, पार्थ, कहाँ हो तुम?” मेजर कृष्णा ने कड़कती हुई आवाज़ में घर में क़दम रखते ही पूछा तो पार्थ क्या, घर की सारी खिड़कियाँ-किवाड़ें काँप गयी एक बार तो। सिर झुकाये एक हृष्ट-पुष्ट जवान २०-२२ साल का पार्थ जब कमरे में आया तो उसे देखकर मेजर साहब और ज़्यादा भड़क गए। “ऐसे कैसे मार…

Srikand : Preet Kamal

सुबह से घर में हलचल है, नए बरतन निकाले जा रहे।हैं, घर को चकाचक चमकाया जा रहा है, रसोई में युद्ध-स्तर पर तैयारी अभी से शुरू है। आखिर कल मुझे देखने लड़की वाले जो आ रहे हैं, वो भी दीदी के ससुराल वालों की ओर से! कमी कैसे छोड़ी जा सकती है खातिरदारी में..! लेकिन…

Durjoy : Mohammed Kausen

“चल मीना अब तेरा नंबर है अच्छे से नाप देना।” सपना ने पास खड़ी मीना को हाथ से खींच कर दर्ज़ी के सामने खड़े करते हुए कहा। “और हाँ चाचा इसका नाप थोड़ा टाइट रखना।” ठीक है बेटा दर्ज़ी चाचा ने अपनी ऐनक सही करते हुए कहा। “पर दीदी टाइट चोली में दम घुटता है।”…

Suyodhan : Joy Banerjee

दिसम्बर का आखिरी हफ्ता शुरू हो चुका था। समय एक साल और बूढ़ा हो गया.. पर मौसम का मिज़ाज़ अबकी कुछ अलग ही था,कंफ्यूज सा, बिल्कुल मेरे जैसा। वरना शिमला में अब तक तो अच्छी खासी बर्फ पड़ चुकी होती है। शिमला में मेरा पांचवा साल है। चार साल पहले एक टीचर बन के मैं…

Kahani Sankalan : Paurush

  भूमिका : नारी सदा से ही साहित्य सृजन की केन्द्र बिन्दु रही है , इसकी चाल – ढाल , हाव – भाव यहाँ तक कि नख-शिख वर्णन में भी साहित्यकारों की विशेष रुचि रही है । सौंदर्य मर्मज्ञ ये रचनाकार नारी को ही इतिवृत्त मान कर पुरुष को नितांत उपेक्षित करते रहे हैं या…

Best Of Swalekh : May 7, 2017

स्वलेख : मार्च 19, 2017 मार्गदर्शक : अर्चना अग्रवाल विषय : आशा चयनित कविताएँ सुहृद! मत देखो- मेरी शिथिल मंद गति, खारा पानी आँखों का मेरे, देखो- अन्तर प्रवहित उद्दाम सिन्धु की धार और हिय-गह्वर का मधु प्यार। ।।१।। मीत! मत उलझो- यह जो उर का पत्र पीत इसमें ही विलसित नव वसंत अभिलषित और […]

Blog Of the Month : Fatima Kolyari

Zikr Aur Fikr नशा तेरी यादों से आता है या तेरे ज़िक्र से.. फासले है फिर भी दिल बैचेन है तेरी फ़िक्र से.. जुबां का ज़ायका बदल जाता है तेरे ज़िक्र से.. अजब सी कशिश महसूस होती है तेरी फ़िक्र से.. अरमान दिल के मचलने से लगते है तेरे ज़िक्र से. ज़ेहन ख़ौफ़ज़दा सा हो…

Best Of Swalekh : April 28

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]

Best Of Swalekh : April 21

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]

Best Of Swalekh : April 16 (II)

स्वलेख : मार्च 19, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]

Best Of Swalekh : April 16 (I)

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने…

दीर्घ कथा संकलन : April 2017

परिणाम बड़ी कहानियाँ लिखना आसान कार्य नहीं है। पात्रों के चरित्र की स्थापना के साथ साथ कथानक में पर्याप्त घटनाक्रम का समावेश करना होता है। किन्तु यही तो कहानियों की लोकप्रियता का आधार है और इसी कारण अच्छा कहानीकार कभी भी पाठकों से विहीन नहीं रहता। आज सिरहाने की कहानी सुहानी प्रतियोगिता में हम लंबी…