Week I : संयोग

संयोग(1)

Ruchi Rana @rushuvi

डूबता हुआ सूरज, गंगा का तट, दुप्पट्टे का एक भीगा कोना, बरगद की वो झुकी डाल… ख्वाहिशों का एक धागा बाँधा था आस की लौ जला के।
एक ख़ामोश ख़याल ..सफ़ों के बीच नज़रबंद सदियों से … बेहद शोर था , भीड़ भी अथाह…ऊपर से रैली के नारों की भयावह गूँज।  वो नज़र से ओझल कहीं भीड़ में।
कितने दफ़े कहा था हाथ थाम लो वरना इस भीड़ में खो जायेगें …बिछड़ जायेगें । नहीं ऐसा नहीं  … होगा ज़रूर कोई ज़मी दोज़ रास्ता।
इश्क़ एक खामोश इबादत है .. सफ़र दर सफ़र और मिलना ..बिछड़ना एक भ्रम .. सादे कागज़ पे ठहरी एक खामोश ख्वाहिश , नज़्म यूँ भी मुक्क़म्मल हुई । 

Pawan Goel @kesariyadesi

एक संयोग ही तो था कि मेरी बाईक ठीक तुम्हारे घर के सामने बंद हुई थी लेकिन किस्मत खुल गई तुम्हें पा कर|

Kush Vaghasiya @kush052

पुराने मकान के बुढ़े टेबल पे कुछ लोग बैठे थे, एक अकडू मालीक, एक वकील और एक व्यापारी।
“सर ये सौदा घाटे का है”
व्यापारी ने कोने में खड़े बच्चों को देखा
“बहुत बड़ा मुनाफ़ा है” और अनाथालय खरीद लिया |
“अब यहाँ स्कुल बनेगा और तुम सब यही रहकर पढ़ोगे ”
ये संयोग ही था की 20 साल पहले एक लड़का इस कैद से भागा था, ज़ालिम दुनिया में गिरता उठता आज फिर वही खड़ा था…
उस कैद को बाग बनाने, उन बच्चों के जीवन से उस काले पन्नों को हटाने जो उसकी यादों की सुनहरी किताब में आज भी दबे है |

Ashish Mishra @justalovelythou

संयोग था के  मैं देर से गाँव पहुंचा | हर घर की खिड़की बंद थी और कुछ के दरवाज़े टूटे हुए| कई कच्चे घर जले – अधजले थे | गाय और बकरियां दिशाहीन भटक रही थीं | हवा में बू थी, जलने की और सुलगने की | मेरी नाक बंद थी ज़ुकाम की वजह से | सर दर्द था | सब धुंधला सा दिख रहा था | शर्मिंदा था कि जलते हुए घरों की आग से मेरा कम्प्कपाना कुछ कम हो रहा था | शाम के धुंधलके में वही आग मुझे कच्ची सड़क के गड्ढों से बचा रही थी |

Inder Pal Singh @jilaawatan ♠♣♥♦

This Week’s Top Story { डॉ. ताहिर ज़ैदी – “मेरे विचार से यह एंट्री सब में बेहतर है। बहुत गठी हुई कहानी है और इसकी भाषा में कोई त्रुटि नहीं है। दूसरी बात, यह देश के मौजूदा माहौल में ये मरहम का काम का रही है।” }

नावेद वर्षों बाद अपने शहर आया था. दीपिका के साथ बीते दिनों की स्मृति आज रविवार की ठंडी सुबह, उसे कॉलेज ले आई. हर रविवार सुबह, दोनो इसी कॅंटीन में मिला करते. नावेद का प्रण था, चाय सिर्फ़ दीपिका के साथ पीएगा अन्यथा कभी नहीं. पर उनके बिच्छड़ने की नियति तो उनके नामों में ही अंकित थी.

स्मृतिमग्न बैठे उदास नावेद को रामपर्वेश ने पुकारा, “भईय्या चाय गर्म है. ले आउँ?” नावेद ने एक ठंडी गहरी साँस ली. वो इनकार में सर हिलाने को हुआ की नेपथ्य से एक पहचानी सी आवाज़ आई, “ये चाय ठंडी पीते हैं… और अकेले नहीं”.

 

Himanshu Tiwari @himanshuinnings

छत के सफ़ेद रकबे में उसका चेहरा बन जाता है।
“सुनो… हमारा मिलना और बिछड़ना एक संयोग ही है न… वो पल जब हम मिले थे । जिसकी निशानियां तुम अपने सरहाने रख कर सोते हो ।”
“हां, कुछ क्षणों के इस संयोग से मुझे ज़िन्दगी जीने बहाना मिला है ।”
“इन से तुम्हें तक़लीफ़ होती होगी, मेरी निशानियों को अपने से दूर कर देना । प्लीज़…”
“कर दूंगा । उस दिन, जिस दिन कोई मेरे बिस्तर के पास बैठ कर ‘वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोपराणि’ सुना रहा होगा और मेरे अधर तुल्सी और गंगाजल से तर हुवे होंगे ।”

Anshu Kumar @anshu9843

विजय को ये नहीं पता था कि उस झुग्गी सा दिखने वाले घर में जुए का इतना बड़ा कारोबार चलता है। सुबह ही उसने एक चेन छीना था, जिसके 3000 रूपये मिले थे। संयोग से उस अड्डे पर उसने रात तक 3,000 के 50,000 बना लिये थे। जीत के नशे में चूर अपनी थकान मिटाने वो एक शराब की दूकान पर जा बैठा, जहाँ उसकी विनोद से झड़प हो गयी। इसी झड़प के बीच विनोद के चाकू की हल्की नोंक उसे छू गयी। बहते हुए खून के साथ गिरा हुआ विजय अपने जेब से गिरते नोट धुंधली आँखों से देख रहा था।

Sandeep Bhutani @dogtired

‘जे तू कुज होर सोच रया है ते बता देनीआँ -ऐ साऊथ इंडियन नहीं चलेगी’
मेरी माँ ने लहज़ा कठोर करते हुए कहा था। मैं भी धुन का पक्का था – ‘ वैसे तो अभी कुछ सोचा नहीं है लेकिन कौन चलेगी और कौन नहीं, ये फ़ैसला सिर्फ़ मैं करूँगा। और अगर ऐसा कहा तो फिर सिर्फ़ यही चलेगी’ ।
वक़्त ने  पन्ने पलटे । जैसे दरिया ढलान पा जाता है बातचीत ने दोस्ती का रूप ले लिया । इसी दौरान बातचीत में मैं जाने कैसे बोल उठा – ‘मुझसे शादी करोगे’ ?
आज  बीस साल बाद भी ख़याल आता है तो सोचता हूँ .. यही तो संयोग है|

Mahesheari Hetaxi @hetaxi1999

दिवाली भी थी और गरीब के घर में मिठाइयां भी…वह इत्तफाक मान बैठा था…नहीं जानता था कि चुनाव आया है!

Shikha Saxena @shikhasaxena191

बेकार का सामान है ये माँ, इसे बाहर क्यों नही निकाल देती …
पर मेरे लिए तो निशानी है बेटा …
बस बुदबुदाकर ही रह गई माँ ..आँखों की नमी छुपाते हुए ..
मेरे मरने के बाद तुम बाहर कर सकते हो ..थोड़ा दृढ़ शब्दों में बस इतना ही कह पाई ….क्या करना है इस सामान का
माँ के खालीपन का एहसास कराती जिंदगी और घर..
प्रश्न इंतजार कर रहा था जवाब का
कुछ नही, माँ की निशानी है ये सब …डबडबाई आँखों से देखते हुए कहा उसने
सामान वही था …घर वही था …बात वही थी ..बस संयोग से लोग बदल गये थे |

Ankita Chauhan @_ankitachauhan

{Aaj Sirhaane Signature Stamp for best writing}

साढे-छ: गज की साड़ी को किसी तरह सम्भालते हुए मेरे कदम सभागार के मंच पर आकर ठहर गए। नज़रों के सामने अंजान चेहरे थे…मैंने अपने साथ लाए पृष्ठ टटोले, जिन्हें देखते ही हथेली पर कुछ बूंदे छितर आई, रिहर्सल कक्ष में ही शायद यह संस्कृति-समन्वय सम्मेलन समपन्न हो चुका था। मेरे दुष्यंत कुमार किसी के मीर-गालिब से बदल चुके थे। मैंने अपनी कविताओं के लहज़े मे ही वो शेर पढ़े और वापस लौटकर उस शख्स को ढूंढ़ने लगी.. तभी एक आवाज़ मेरे कानों में फुसफुसाते हुए मंच की बढ़ गई “तुम थोड़ी उर्दू बन चुकी हो…मैं थोड़ी हिन्दी बन जाता हूँ” ।

Aruna Khot @arunapk57

जीवन के उस पड़ाव पर जब बचपन बहुत याद आता है मुझे स्कूल में मेरे साथ पढ़े हुए मित्रों की बहुत याद आती थी। स्कूल के बाद हम सब मित्रों का संपर्क नहीं रहा। जब बेचैनी बढ़ी तो 2010 में अपना और स्कूल का विवरण एक वेबसाइट पर डाला। कमाल ये हुआ कि एक मित्र ने संपर्क किया। मैं और मित्र एक ही ऑफिस एक ही फ्लोर पर पिछले 5 साल से काम कर रहे थे पर पहले कभी नहीं मिले थे। 37 साल बाद मिले तब हमारी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। इस सुखद संयोग को आप क्या कहियेगा?

Kamal Tiwari @balliawalebaba

इस बेजान हो चुके जिस्म की रूह कराहती हुई यही सवाल कर रही थी कि आखिर ये वक्त ने कैसे करवट ली है .. जब लगने लगा है कि जीवन एक मायूस शख़्शियत बन के सिमट गया है। कभी गम के बादलों को अपने धैर्य की ..

कैंची से धीरे-धीरे  छांटते हुए ख़ुशी के दो पलों को गले लगाया करते थे और आज ये उँगलियाँ मेरी मां के आँखों से आंसू तक नहीं पोंछ पा रही जो मुझे तड़पता हुआ देखकर रो रही है। ये कैसा संयोग है कि आज मुझे जन्म देने वाली माँ मुझे मरता हुआ देख रही है।

Jaikishan Tulswani @_iamjk

शाम के 7:30 बज रहे थे…शुरू हुई हल्की-हल्की बारिश ने पुराने दिन याद दिला दिए जब दोस्तों के साथ बारिश का मज़ा लेने निकल जाते थे…और आज मैं दफ़्तर  में हूँ और सब दोस्त अलग-अलग शहरों में..खैर मैं अपना काम ख़त्म कर दफ्तर से निकल रहा था की मेरे फोन की घण्टी ने मुझे मुस्कुराने का मौका दिया….ये मेरे एक दोस्त का फोन था…जिससे मिले लंबा वक़्त बीत चुका था….वो शहर आया हुआ था…मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा…ये सब एक संयोग ही था की जो लम्हे बचपन के मैं सोच रहा था उन्हें फिर से जीने का मौका मिला है|

Shubham Bais @AnIndianSHUBHAM

अख़बार पढ़ते ही वे सदमे में आ गए, खबर थी- “कल रात कार एक्सीडेंट में एक सत्रह साल के युवक की जान चली गयी, चेहरा बुरी तरह जख्मी है। लाश की पहचान की जा रही है।”

इसे “संयोग” कहे या “दुर्योग” उनका भी इकलौता बेटा तीन दिनों से लापता था। सारे घर में शोक व्याप्त हो गया, वे दौड़े-दौड़े पुलिस स्टेशन गए, लाश को ध्यान से देखा और ख़ुशी से एक गहरी साँस लेकर कहा “थैंक गॉड, ये मेरा बेटा नहीं है।”

10 Comments Add yours

  1. Nimit says:

    Woww.. loved reading all of them… very nice initiative by Aajsirhaane..
    Totally agree with selection of top story and signature stamp story

    Just one suggestion from my side – there should be some editor who can do corrections related to punctuation, grammar and maatra. Any such corrections can be notified to the writers as well. This will help them in becoming a better writer.

    Thanks
    Happy Writing 🙂

    1. aajsirhaane says:

      Nimit, Thank you. I want to see a entry from you next time. 🙂

      I completely agree about the editing part. This will be my priority in the coming weeks. If you would like to copy edit for a week, let me know.

      A.

      1. Nimit says:

        So nice of you Anu mam. I will try to put up an entry for upcoming weeks.
        For the editing part, I’ll be more than happy to take this assignment.

  2. jilaawatan says:

    मैं उल्लेख करना चाहूंगा यहाँ ताहिर ज़ैदी साहब (@DrTahirZaidi) के प्रति अपनी कृतग्यता का, जिन्हें आदरस्वरूप मैं भाई साहब कह कर बुलाता हूँ.

    जैसा की हम सब जानते हैं, ताहिर भाई साहब हिन्दी और उर्दू के विरले भाषाविद’ओं में से हैं जो दोनो भाषाओं में समान रूप से प्रवीण हैं. इनके विनम्र प्रयासों द्वारा संचालित hashtag, #AajkaShbd बहुत लंबे समय से समस्त ट्विटर वर्ग में भाषा/शब्द ज्ञान का संचार कर रहा है. जहाँ एक ओर मैं आभारी हूँ की उन्होने अपनी व्यस्त और कर्मण्य दिनचर्या से हम सब की लेखनी को समय दिया.. वहीं दूसरी ओर मेरी कहानी के प्रति उन की अविस्मरणीय सराहना के लिए मेरा उन्हें सादर धन्यवाद. एक नवदीक्षित और प्रयासरत रचनाकार के लिए इस से महत्वपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता कि वो ऐसे विद्वान की सराहना का पात्र बने जो भाषा ज्ञान में अति दक्ष एवं निपुण हो. और ताहिर भाई साहब के बारे में ये सर्वविदित है 🙂

    AajSirhaane की संचालिका का भावपूर्ण धन्यवाद, इस उत्तम उपक्रम के लिए जिस से हम सब को सृजन का एक सुखद अवसर प्राप्त हुआ.

    अंततः समस्त मित्रों का भी धन्यवाद जिन्होने अपनी प्रोत्साहना द्वारा सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया.

    1. Qatal story by @jilaawatan. Loved it so much that it has stayed with me, i had to come back to re-read it. Kudos!

  3. जब लिखना शुरू किया था.. तो माध्यम हिन्दी था.. लेकिन टवीटर पर एक ट्रेड सा चलता देखा.. अगर आप अग्रेज़ी में लिख सकते हैं तो लोग आपको पढेगे .. अन्यथा नहीं। धीरे धीरे कुछ लोग जुड़े .. अनु दी का ब्लोग मेरे लिए एक इंसपिरेशन था.. हिन्दी में भी खूबसूरती से लिखा जा सकता है .. और आप के द्वारा लिया गया यह प्रयास सराहनीय है .. !

    ताहिर जैदी .. जी का बेहद शुक्रिया .. खुद को खुशनसीब समझती हूँ कि मेरा प्रथम प्रयास ‘आपके’ द्वारा सराहा गया।

    Keep Shining 🙂

    Blog Link : http://soundingwords.blogspot.in/2015/11/Sanyog-Short-Story-Hindi.html

  4. shubhambais says:

    सचमुच एक बेहतरीन प्रयास है।
    मुझे लगता है इससे मुझ जैसे नए लोगों को एक मंच मिलेगा।
    शुक्रिया

    1. aajsirhaane says:

      Shukriya .. likhte rahein 🙂

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