Week 3: Sugar Free

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लड्डू by Siddhant @Siddhant01

– अरे! आपने अब तक दवाई नहीं ली? जन्मदिन के दिन भी उदास हो, आज तो हँस दीजिये।

– कैसे हँसू , तुम ही कहो? ना मिठाई, ना केक और ना तुमने मुझे मुन्नी की टॉफी खाने दी।

– आप समझते क्यूँ नहीं? ये मीठा आपके लिए ठीक नहीं।

– अच्छा जी! लेकिन तुम तो मुझे रोज़ मीठा खिलाती हो।

– अच्छा जी! वो कैसे?

– जब अपने हांथो से मेरे गाल खींचते हुए कहती हो – “तुम बिल्कुल लड्डू हो”.. तब

– मुझे लड्डू से बेहद प्यार है। समझे मेरे ८० साल के लड्डू? चलिए अब आप अपनी दवाई ले लीजिये।

बगावत By Ashish @as_illusion

मनमाफ़िक गुज़र रही थी…ज़िन्दगी के स्वाद चख रहा था .. हर रोज़ पिज़्ज़ा, पास्ता, ड्रिंक्स वगैरह..घर की रोटी सब्जी में वो बात कहां थी…पर लगता था जैसे कोई नाराज़ होता है…खैर वो रातों को देर तक जागना..आहा..पर सुबह दुखती आंखें शायद शिकायत करती थीं मुझसे..

एक दिन अचानक बात बिगड़ गयी..डॉक्टर के पास जाना पड़ा.. मालूम हुआ डायबिटीज है..

बगावत कर दी थी मेरे शरीर ने.. नज़रंदाज़ जो किया था इसे … खैर.. मनाया इसे..थोड़े नखरे दिखाए इसने, कुछ बातें तय हुईं.. अब सुनता हूं इसकी भी… अपनी भी मनवा लेता हूं कभी.. सब ठीक चल रहा है.. अब इकतरफा तो कुछ भी अच्छा नहीं…

 

मिठास by  Ankita Chauhan @_ankitachauhan

{Aaj Sirhaane Signature Stamp for best scene creation}

अब वो वृद्धा मेरे लिए उतनी अनजान नहीं रही। आरोग्यशाला के इस छोटे से कक्ष में मेरी नज़र…अक्सर उनकी सूकून भरी मुस्कान पर जाकर ठहर जाती। रोज सुबह उनका बेटा मिलने आता है …हाथ में एक टिफिन और बाज़ू में अखबार दबाए। लेकिन उनका मुख्य शगल खिड़की के बाहर उड़ते कबूतर…छज्जे पर टंगे गमलों को अपलक देखना था। डाइबिटीज़ ने…स्वस्थ दिखने वाली उस वृद्धा का दाहिना पैर निगल लिया था..एमप्यूटेशन।

मैंने पूछा तो बोली “शायद मैं कुछ ज्यादा मीठी हो गई थी…सोचती हूँ यह मिठास…समाज़ में घुल जाती तो मैं भी अखबार पढ़ पाती…देखो ना रिश्तों की तरह बेजान पड़ा रहता है।”

 

शुभ विवाह By Fayaz Girach @shayrana ♠♣♥♦

{Selected as Top Story of the Week by Guest Editor}

ये घर, एक पुरानी ईमारत और उसकी बेटी को संभाले हुए है। आज उसी बेटी की शादी है ।

बेटी ने पिता की डायबिटीज़ का ख़्याल रखतें हुए अपनी शादी में सुगरफ़्री मिठाई बनवाई है।

लेकिन शादी के दिन जाने कैसे ब्लड सुगर बढ़ गया और पिताजी को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा ।

डॉ. ने सीधा कहा – “हालत गंभीर है । आपको इनके साथ रहना पड़ेगा ।”

दुल्हन दुल्हे से बोली – ” शायद विवाह मेरे भाग्य में नहीं है । “

मगर दुल्हे ने अनोखा इलाज बताया।

प्यार से अपनी दुल्हन से कहा, “सुनो, मुझे दहेज़ में तुम्हारे पिताजी चाहिए “

दस साल बाद By Jaikishan Tulswani @_iamjk

मैं ठीक दस साल बाद उसी कॉफी टेबल पर बैठा था..जहाँ हम पहली बार मिले थे…पर आज मैं अकेला था और तुम्हारी कुर्सी भी…मेरे बालों में सफेदी और चेहरे पर उम्र थी……मेरा दिल आज भी तेजी से धड़क रहा था…जिस तरह पहली बार तुमसे मिलने पर धड़का था…वेटर ने आकर पूछा…सर आर्डर प्लीज…और मैंने वही ऑर्डर कर दिया जो हम पहले अक्सर दिया करते थे….अगले ही पल कॉफी टेबल पर थी…तभी मेरा फ़ोन बज उठा….जिसने मुझे याद दिलाया की मुझे अभी दवाई लेनी है…मीठी सी डायबिटीज़ जो है….सही है कुछ भी पहले सा नहीं है…तुम भी तो नहीं…

लड़ना, जीतना और ज़िन्दगी By Mahesheari Hetaxi  ♠♣♥♦

{Selected as Top Story of the Week by Guest Editor}

मोटा चश्मा था, बाल कम, फीका पर हसता चेहरा, उम्र करीब बारह साल होगी ..!!
खेल में टॉफी जीता था… मुँह में रख ही रहा था कि माँ ने प्यार से हाथ रोका ..

उसने हँसते हँसते हारने वाले को टाफी दी ..
मैंने पूछा, “आपको टॉफी पसंद नहीं है?”
बडों सा हंस कर बोला, “टॉफी पसंद है और चोकलेट्स भी .. पर .. पर मुझे “डायबिटिस” है दीदी ..

इस पर उसकी माँ बोल पड़ी .. मेरे “कुश” को चोकलेट्स बहुत पसंद है, पर लड़ना, जीतना और ज़िन्दगी चोकलेट्स से ज्यादा पसंद है.. क्यों कुश बेटा?

मजबूरी By Shubham Bais @shubham__2

{Aaj Sirhaane Signature Stamp For Out Of The Box Thinking}

दिलसार मियां अपनी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में कुछ परेशान से बैठे थे, बढ़ती प्रतिद्वंद्विता ने उनकी आमदनी कम कर दी थी। उधर अब्बाजान की डायबिटीज की बिमारी लग गयी , उनकी दवाई का खर्च दिलसार मियां पर भारी पड़ रहे थे।
तभी उनकी टेबल पर आवाज हुई, सामने पड़ोस के चौहान बाबू खड़े थे।
“मियां, जरा ये मोबाइल देखना क्या हो गया है।”
दिलसार ने झटपट मोबाइल की परेशानी खोज ली…
“अरे ये तो बड़ी चपत हो गई हैंगिंग का प्रॉब्लम है, शायद वायरस आ गया है, हज़ार रुपये लगेंगे।”
मजबूरी दिलसार मियाँ को भी बेईमानी सीखा गई।

स्वर्गं नर्क By Rinku Arsh @tiwari_rang

पुश्तों को मेरी बताना ज़रूर के था कोई बुजुर्ग जिसने करोड़ों की ज़मीन खाली करवाई उन गिध्दों से जो मेरी मौत का इंतजार कर रहे थे”

बेड़ियों में बंधे दारजी ने अस्पताल बुलाया, सज़ा पड़ी थी लूट की अपना काम्प्लेक्स खाली करा के सामान कबाड़ी को बेच दिया था अतिविश्वास में।

मौकापरस्त किरायेदार ने पहले से ही रेकी करवा रखी थी पुलिसवालों को घूस देकर। रंगे हांथो पकड़ाए, जेल हुई, हाई डायबिटीज़ के मरीज़ थे, शरीर सड़न ले चूका था आख़री सांसे अस्पताल में चल रही था।अंतर्द्वंद से अहसास हुआ स्वर्गं नर्क यहीं तो हैं।अब कब्ज़ा ना था ; जान भी।

थैंक यू पापा By Shikha Saxena @shikhasaxena191

बरसों बाद घर लौटे रोहन की मुस्कराहट उड़ गई .. अपने हमउम्र दोस्त संजय को बीमार देखकर चिंतित हो गया …

क्या हुआ?

क्या नही हुआ . बी पी ,शुगर  …काश मेरे पापा ने भी तेरे पापा जैसे मेरा ख्याल रखा होता ..

सुनकर याद आया .. सुबह-सुबह दौड़ना.. खाने में अनुशासन मुझे कितना अखरता था .. कभी इसके लिए थैंक यू बोलोगे… पापा हंस देते  .. संजय के पापा कितने अच्छे है कभी खाने और सोने के लिए नही टोकते ..

मन भर आया .. मैं अपने बेटे के लिए बिलकुल अपने पापा जैसा बनूँगा .. थैंक यू पापा ..

दीवाली की मिठाई By Nimit Rastogi @_chitr

राशी को अब अगर कोई मोटी कहकर बुलाये भी तो उसे फर्क नहीं पड़ता लेकिन कुछ साल पहले तक गुस्से से आग बबूला हो जाती थी। शायद राशी अब समझने लगी थी की सब लोग उस से कितना प्यार करते हैं।

 कुछ दिन से लोग राशी को कमजोर कहने लगे थे। शुरुआत में तो लगा कि सब उसका मज़ाक बना रहे हैं पर आज जब राशी ने अपना वज़न मापा तो यकीन नहीं हुआ कि 8 किलो वजन गिर चूका है।
जब राशी ने पिताजी को बताया तो उन्हें कुछ संशय हुआ। रक्त जाँच से पता चला कि टाइप २ डायबिटीज है ..

राशी ने इस बार दीवाली बिना मिठाई चखे कैसे गुजारी है ये राशी ही जानती है।

गुलाब जामुन By Kush Vaghasiya @kush052

दीवाली पर मेरा घर देर से आना दादी को बिलकुल नापसंद था | मैंने उनके कमरे में झाँका.. शायद मेरा इंतज़ार करते करते सो गयी थी ..

उनके हाथ पे सुई के ज़िद्दी निशान देख आकर याद आया की उनको गुलाब जामुन कितने पसंद है, काश मैं उनके लिए ला सकता !

“अरे आ गया तू!”
उन्होंने उठते ही एक छोटा मिठाई का डिब्बा निकाल लिया।
“दादी ?!”
“डॉक्टर ने दिए है, पुरे साल तो कुछ खाने नही देता, आज खुद से ही सुगर फ्री गुलाब जामुन दिए ..सोचा तेरे साथ खाऊँगी”..
मैं हँसने लगा | हमारा बचपन आज भी जिन्दा है, हमारे बुज़ुर्गों के पास ..


 

 { डॉ ताहिर जैदी – “अबकी बार दो कहानियाँ सबसे अच्छी लगीं .. शुभ विवाह और लड़ना जीतना और ज़िन्दगी .. दोनों में से एक चुनना बहुत मुश्किल होगा .. इन दोनों में डायबिटीज को कहानी के ताने बाने में अधिक सहेजता से बुना गया है..

शुभ विवाह कहानी में कई सन्देश हैं जैसे दहेज़ प्रथा का छिपा हुआ विरोध .. विवाह उपरान्त बेटी का अपने पिता की तरफ प्यार और घर के नए बेटे  की भी जिम्मेदारी , पति पत्नी का प्रेम और निश्चलता ..

लड़ना,  जीतना और ज़िन्दगी कहानी में डायबिटीज का अधिक खतरनाक प्ररूप… अर्थात जुवेनाइल डायबिटीज .. उसका ज़िक्र है .. एक माँ का प्यार झलकता है .. एक बच्चे का संयम ..बच्चे का न सिर्फ टाफी  न खाना बल्कि अपने प्रतिद्वंदी को दे देना” }

 

7 Comments Add yours

  1. Cradle of Words says:

    ताहिर जी और अनु दी का बेहद शुक्रिया ..
    आज सिरहाने कीप शाइनिंग 🙂

    1. aajsirhaane says:

      Congratulations Ankita 🙂 you are a shining star

  2. shubhambais says:

    कठिन विषय के बावजूद लेखकों ने इतनी अच्छी प्रस्तुतियां दी, सचमुच “आज सिरहाने” ने जामवन्त का काम किया है।
    शुक्रिया, आभार

    1. aajsirhaane says:

      Congratulations Shubham. Must keep writing ..

      1. shubhambais says:

        हां जरूर, कोशिश करूँगा।

  3. hetaxi says:

    Really all stories are superb… Thank you ma’am for giving us the opportunity to write on an important topic… It was a great experience…
    Thank you 🙂

  4. Fayaz Girach says:

    Now This Will Inspire My Pen To Write A Few More Words.
    This is 1st Ever Story Written By Me.
    Surprised, Shocked & Overwhelmed By The +ve Response That Followed.

    Here Thanking The @Sai_ki_bitiya
    Will Be Happy To Her Name.
    As Mentioned In The E-Mail, Salute To Her For This Beautiful Concept.
    Can’t Thank You Enough For That.

    Last But Not The Least,

    Dr. Tahir Zaidi – Thankyu Sir For Editing & Selecting My Story.
    Shukriya – Inayat Sir !!

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