Week 5: The Girl & The Meter of Life

dec 14 cue picture
A Still by Rahul Jain @chilled_yogi

लुक्का छुप्पी By Harleen Vij @VeiledDesires_

 कई दिनों से वह ये खेल खेल रही थी। हर दोपहर, चुप के से, किसी किनारे जाकर बैठ जाती। आगे पीछे देखती, कई बार देखती, फिर धीमे से अपना दायाँ हाथ आगे करती और रोटी की एक बुरकी फटाफट मुँह में डाल लेती। आज भी उसे यह खेल खेलना था मगर आज उसे सिग्नल के मैनेजर ने पकड़ लिया था। मायूस, भूखी, उस ऑटो में बैठी वह अपने नाख़ून चबा रही थी। लुक्का छुप्पी बच्चे शौक से खेला करते हैं मगर भूखे पेट ने उसे यह अलग सी लुक्का छुप्पी का शौक लगा दिया था।

 

जश्न का मौका By Hetaxi Maheshwari @hetaxi1999

{Aaj Sirhaane Signature Stamp For Capturing Sheer Innocence Of Children.}

 मैंने ऑटो रोका, एड्रेस चेक किया और छोले का बड़ा पतीला अन्दर रख आया। पूजा छोटे-छोटे पतीले निकाल के रखने लगी।

“अरे पूजा … जल्दी उठाओ, देर हुई तो पैसे काट लेंगे…”

पूजा ने सुबह से कुछ नहीं खाया था और अब उसके पेट में गुड़ गुड़ हो रही थी… इतने में घर के अन्दर से एक छोटी बच्ची बाहर आई – “ये लो केक… आज मेरा बर्थ डे है”

पूजा ने शरमा के केक लिया .. “हैप्पी बर्थ डे, क्या नाम है आपका?”

“आफरीन”

मज़हब-जात, अमीरी-गरीबी… सब देखते रहे… बच्चियों ने जश्न का मौका न गँवाया!

 

शक्ति By Ajay Purohit @Ajaythetwit

“बीबी जी, इस कमला को भी कोई काम दिलवा दो”

“अरे, ना शन्नो, इसे तो पढ़ाना चाहिये”

“हमारे भाग में कहाँ… बाप शराबी है, काम ना करेगी तो बेच खायेगा”

“चलो हटो, स्कूल को देर हो रही है” रामशरण ने ऑटो रिक्शा को चालू करते हुए कहा।

“बाबा, मुझे भी ले चलो ना स्कूल”

“अच्छा अम्माँ, आज बात करूँगा” हँसते हुए रामशरण ने बिटिया को समझाया।

 “अरे, इतनी सी बात ! मैं उसे पढ़ने का अवसर दूँगी”

“आपका बहुत आभार” रामशरण ने हाथ जोड़ते हुए प्रिंसिपल साहिबा से विदा ली।

 आज कमला के पास अवसर था, किसी के भविष्य को सँवारने का।

 

रानी मुनिया By Ashish Mishra @justalovelythou

नाखून चबाती मुनिया सोच रही थी आज कोई खेलने नहीं आया। सोसाइटी के कोने में खड़ी एक पुरानी ऑटो उनका अड्डा था। रानी मुनिया वहीं अपने बड़े छोटे फैसले सुनाती थी। एकाएक से उसके कानों में एक आवाज़ आई, देखा एक कुत्ते का बच्चा ऑटो के पीछे छुपा बैठा था। अकेला, डरा हुआ, ठण्ड में काँपता उसकी ओर देखकर कूँ कूँ करने लगा।

पहले सोचा – कितना प्यारा है, इसे घर ले जाती हूँ | फिर रुकी, कुछ याद आया और उसे उठा कर पहली मंज़िल में अकेले रहने वाले दादू के पास दौड़ पड़ी।

 

निर्भया’ का बदला By Harish Bisht @askharishbisht

एक लड़की जिसके लिये उसका दोस्त सबकुछ था उसने उसके साथ रेप किया। जिंदगी के कई साल डर और सदमें में खराब हो गये। तभी उसका नया रूप देखने को मिला और उसने बनाई ‘रेड ब्रिगेड’। जिसमें रेप सर्वाइवर और छेड़खानी की शिकार लड़कियाँ थीं। ये लड़कियाँ पहले छेड़खानी करने वाले लड़के को समझाती और उसके ना मानने पर ये उसकी पिटाई कर देती।  इनको देखते ही जो मनचले सड़कों पर बेखौफ घूमते और छेड़खानी करते वो अब अपने घरों में दुबक गये। महिला अत्याचार के खिलाफ निर्भया की याद में हर महीने 29 तारीख को अब ये विरोध करती हैं।

 

सपने By Shikha Saxena @shikhasaxena 191

{Aaj Sirhaane Signature Stamp For featuring the remarkable spirit of a mother taking her daughter’s future into her own hands.}

“ये टैक्सी मैं इसलिए चलाता हूँ ताकि तुम बड़ी होकर, बड़ी अफसर बनकर अपनी गाड़ी में घूमों…”

रोज सुबह बापू उसकी आँखों में सपने भर जाते लेकिन लौटती शाम वो सपने दिन में ही कहीं छोड़ आती। शराब ने पहले घर को खोखला किया और फिर बापू को दूर कर दिया। अब उन आँखों में कोई सपना नहीं बस एक खालीपन बस गया था।

लेकिन एक दिन माँ को सुबह तैयार देखकर आँखों में कुछ प्रश्न उभरे… माँ मुस्कुराई… जा रही हूँ… उसी गाड़ी से फिर कुछ सपने खरीदने। आँखों का खालीपन सिमटता जा रहा था… सपने अपनी जगह वापस आने लगे थे!

 

मीटर जीरो जीरो By Kush Vaghasiya @kush052 ♠♣♥♦

{Top Story of the Week selected by Guest Editor Anand Pandey. “मीटर जीरो जीरो it is. It takes a picture and makes it ‘ Shaheen’s ‘ story effortlessly and beautifully. It stays well within the boundaries of our  Aaj Sirhaane’s format. This beats the rest by a distance. Jai ho.” }

शाहीन के अब्बु रिक्शा चलाके उसकी स्कुल-फ़ीस भरते थे। हर शाम जब शाहीन रिक्शा का अंग्रेजी मीटर पढ़ती थी तो अब्बु बड़े खुश होते थे। पर जब से शाहीन के अब्बु का इन्तकाल हुआ है तब से वो दौड़ता मीटर थम गया है। शाहीन की माँ अब शाहीन को स्कुल नहीं भेजती। वो उदास लड़की हर दोपहर रिक्शा के पास आती है, इस उम्मीद में की कोई फ़रिश्ता फिर एक बार उसकी ठहरी ज़िन्दगी का “मीटर” डाउन कर दे!

 

खनकती ख्वाहिशें By @_ANKITACHAUHAN   

वह सपने देखती है, जागती आँखों से ज़िंदगी के और आँख मूँद कर किताबो के। वह बेसुध थिरकती है कभी बाबा की डाँट पर तो कभी माँ के दुलार पर। हर इंकार पर थोड़ा सहम जाती है, अपनी ख्वाहिशों के पंख समेट इंतज़ार करती है… मजबूत करती है हर वो पक्ष जो उसे अपने सपने के शायद और करीब ले जाए। कहने को बच्ची है लेकिन अपना बचपन काफी पहले पीछे छोड़ आयी है। लादी हुई समझदारी से जब खुद को परेशान पाती है तो नादानियों की झील में एक डुबकी लगा, बस एक कहानी गढ़ लाती है…। 

 

दीमक खा गए देश By Fayaz Girach @shayrana

Late entry. Not part of the selection process.

घर में जगह ना होने से सीता ऑटो में आकर बैठ गई ।
रसोई-घर, शौचालय, एवं स्नानगृह वहीं था, जो भी था ।

” मेरा अपना घर होगा ? हां ।……… शायद ।…… कब ??
पिताजी शराब छोड़ देंगे  ? और….पैसे…”
भूख को चबाते हुए, सीता सोच रही थी…..

मोहल्ला इकठ्ठा हो गया अस्पताल में,अस्थमा था।
दो साल से किसी रासायनिक फैक्ट्री में मज़दूरी करती थी सीता। ऊपर से दिल्ली का प्रदुषण ।
आखिर ग़रीब, ग़रीबी का इलाज कैसे करता ?

कहीं चुनावी मुद्दा – कहीं समाचारों की शोभा बन चुकी थी ये खबर । ग़रीबी के सर पर दुःखो की वर्षा हो रही थी और राजनीति की फ़सल उगाई गई ।

9 Comments Add yours

  1. Wow.. loved all stories ..esp Meter zero zero and Sapney by Shikha !
    keep shining #AajSirhaane 🙂

    1. aajsirhaane says:

      I agree. Thanks Ankita 🙂

  2. kush052 says:

    Thanks for words, sir :))

    Sikha ji, u r the best…
    आपकी खूबसूरत स्टोरी पढ़के बड़ा सुकूँ मिला, आप से हर बार कुछ सिखने को मिलता है 🙂
    & हेतु, tu toh sbdho ni raj kumari cho j 😉 keep writing, keep smiling…

  3. kush052 says:

    Thanks for the words sir :))

    Shiksha ji, u r the best…
    आपकी खुबसूरत स्टोरी पढ़ के बड़ा सुकूँ मिला, लगा जैसे मेरी स्टोरी में जो छुटा था वो आपकी कहानी में मिल गया, आपसे हर बार कुछ नया सिखने को मिलता है…
    & hetu, tu toh shbdo ni raj kumari cho j 😉
    Keep writing, keep smiling :))

    SKB ma’am, इस खुबसूरत पलह के लिए आपको अभिनन्दन, Thanks much :))

  4. अति उत्तम | आप हिंदी के अपने माइक्रो ब्लॉग http://मूषक.भारत पर क्यों नहीं डालती ये कहानियां

  5. shikha saxena says:

    बचपन में अक्सर मैं छोटी-छोटी कहानियाँ लिखती थी राजा रानी की और जब कोई पूछता तो कहती कि ये मैं चंदामामा और नंदन में भेजूँगी ..वो तो खैर नही हो पाया लेकिन वो चीज जो कहीं दब गई थी उसे आज सिरहाने ने मुझे वापस लौटा दिया …शुक्रिया ये मंच देने के लिए और सराहना के लिए 🙂
    सबकी कहानी बहुत खूबसूरत लगी मुझे और दिल को छू लेने वाली

    1. aajsirhaane says:

      Awww 🙂 aap janm se hi lekhika hain .. Thank you for participating 🙂

  6. what a great initiative…very good platform to express your hidden writer…kudos SKB…loving AAJSIRHANE…

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