‘फ्लैशबैक’ By Fayaz & Nimit

TEAM 1

लेखक जोड़ी नंबर 1 : Fayaz & Nimit

कहानी : ‘फ्लैशबैक’

“आप को अगर मिलना है तो कहीं और मिलिये, मैं उस कमरे में नहीं आऊंगा”, राज ने नारायण शंकर से कहा।

“कैसे नहीं जाओगे बे? हम तुम्हे घसीटते हुए ले जायेंगे।”

राज को मजबूर होकर उस कमरे में आना ही पड़ा जहाँ मेघा की तस्वीर थी। जैसे ही राज और नारायण

शंकर मेघा के सामने आये, वो जोर से हंस दी और राज से बोली –

“देखा मैंने कहा था ना कि मेरे पापा तुमसे लम्बे हैं। तुम शर्त हार गए। निकालो चवन्नी!”

“चुप कर”, राज ने झल्लाते हुए कहा, “यहाँ अगले महीने से नौकरी के वांदे हो रहे हैं, तनख्वा नहीं

मिलेगी और तुझे चवन्नी चाहिए।”

“ऐ बबुआ, ये मेरी बेटी मेघा की तस्वीर से क्या बात कर रहे हो बे? पगला गए हो का?” नारायण शंकर

ने राज से पुछा।

राज नारायण शंकर से (घुटनों के बल बैठकर) – “मैंने मेघा से शर्त लगायी थी की मैं आपसे लम्बा हूँ।

मगर आप मुझे इस कमरे में मेघा के सामने ले आये और मैं शर्त हार गया। मैं हार गया सर और आप

जीत गए। आपकी बेटी जीत गयी।”

“हा हा हा हा” नारायण शंकर और मेघा दोनों राज पर हँसते हैं।

“शर्त में मैं चवन्नी हारा हूँ। जब आप मेरे बकाया पैसे देंगे तो उसमे से चवन्नी काट लेना।” राज ने

कहा।

“तो तुम बस चवन्नी कमाने के लिए गुरुकुल में आये थे? और तुम मेघा से कब मिले? वो तो तुम्हारे

गुरुकुल आने से पहले ही… ” नारायण शंकर कहते कहते रुक गए।

राज ने सच बताया – “सर आ आ आप मुझे जानते नहीं। मैं राज आर्यन। पूरा नाम – राज आर्यन

मल्होत्रा।”

“और मैं विजय, पूरा नाम विजय दीनानाथ चौहान। माँ का नाम… हैय्य्य्य”

“हा हा हा हा” मेघा हँसते हुए राज से बोली – “लो संभालो अब इन्हें। लगता है दवाई लेना भूल गए। फिर से फ्लैशबैक में चले गए।”

“अब ककक्क्कक्क्कक्क क्या करें?”

“पहले तो हकलाना बंद कर, हकले। उम्म्म्म.. वो रही, वह सामने पड़ी दवाई पिला दो जल्दी से।”

“ये तो शराब है!”

“ये भी तो ‘शराबी’ थे”

नारायण शंकर (भारी आवाज़ में गाना गाते हुए) – “मैं शराबी… तो… नहीं…”

अचानक मेज़ के ऊपर चढ़कर चिल्लाते है –

“सरज़मीं ऐ हिंदुस्तान।

अस्सलामु अलय्कुम।

मैं साला बादशाह खान, हैय्य्य्य।”

निचे उतरकर राज को गले लगाते है –

“कभी कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है…”

मेघा – ” अभी रेखा जी के पास है, जया जी के पास आने में थोड़ा समय लगेगा ।”

नारायण शंकर मेज से गिरकर खड़े होते है और राज को कुर्सी पे बैठा देख गुस्से से –

“ये गुरुकुल है, तुम्हारे बाप का घर नहीं। कोई बकाया पैसा नहीं मिलेगा तुम्हे। और शर्त की चवन्नी

भी निकलवा ली जायेगी।”


Penned by Writer Duo :

Fayaz Girach @shayrana

&

Nimit Rastogi @_Chitr 

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