Week 8 : यह गुलसिताँ हमारा

{Note From Guest Editor @kuhu_bole : “Class of 2016, इस बार शानदार कहानियां मिली हैं। कहा था ना हिंदुस्तान में जितने रंग है उतनी कहानियां मिल सकती हैं। शब्दों की सीमा में रहकर बहुत अच्छी कहानियां लिखी गई हैं। इनमें से कोई एक कहानी चुनना बहुत ही मुश्किल लगा।” }


Saare Jahaan Se AchhaHindustan Hamaara

एक सड़क By Varun K. Mehta @funjabi_gabru

“कुरान ऐ पाक की चोरी, यह तौहीन हम कभी नहीं सहेंगे” मौलाना साहब ने आखिरी फैसला सुना दिया ..

“हिम्मत कैसे हुई, श्रीमद्भागवत गीता को हाथ लगाने की” पंडित जी की गर्जना दूर तक सुनाई दी ..

मंदिर और मस्जिद के बीच गुजरती एक सड़क ही थी मगर फासला शायद मीलों का था ..

“ये हम ने चुराई थी .. स्कूल में ड्रामा के लिए प्रोप चाहिए था ..”

“ये देखिये .. हमारे नाटक “कौमी एकता” को पहला इनाम मिला है”

 कहीं दूर से आवाज आ रही थी  “सारे जहाँ से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा” ..

{Note From @Kuhu_Bole: एक सड़क और विचारधारा : ये दोनों कहानियां मजहब या धर्म से परे एकता की मिसाल देती हैं। सधी हुई भाषा, डायलॉग बेहतरीन हैं। }

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 ट्रान्सफर By Varun K. Mehta @funjabi_gabru

“सर, ४ करोड़ के ड्रग्स और १० आदमी, २ मारे गये, एक भी फरार नहीं .. “

“सर, हमारे 4 लोग शहीद हुए है और दो घायल है सर”

“जी सर, उनका सरगना मुश्ताक़ खान भी है सर”

“जी सर, मिनिस्टर एजाज़ खान का भतीजा “

“लेकिन…”

“मगर…”

चुप्पी ..

“सर, आई ऍम सॉरी .. यह मेरे लिए मुमकिन नहीं, मैं उसे नहीं छोड़ सकता.. मुझे ट्रान्सफर मंज़ूर है सर “

अजित ने रिसीवर रख दिया ..

पर्ह्लादपुर? कहाँ है यह गॉव ?? अजित सोच रहा था

रेडियो पर गाना बज रहा था “सारे जहाँ से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा”

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दादा जी की बरसी By Nimit Rastogi @_Chitr

ताया जी, चाचा जी और बुआ जी का परिवार सभी लोग घर पर आये हुए थे। दादा जी की बरसी थी। उन्हें शहीद हुए २० साल से ऊपर हो चूका है। उनकी एक तस्वीर है घर में तो मुझे चेहरा याद है उनका वरना बाकी सभी यादें धुधली हो चुकी हैं।

दादा जी की बरसी सिर्फ एक बहाना बन गयी है ताकि परिवार के सब लोग एक बार मिल लें, बस।

खैर, अब सब बच्चा पार्टी भी साथ थी तो समय बिताने के लिए अन्ताक्षिरी खेलना शुरू किया। मुझे ‘स’ अक्षर से गीत गाना था। मेरे दिमाग में गाना आया ही था कि पीछे से दादी, जो बहुत देर से चुप थी, गाने लगी – ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा….’ !

 

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 ये गुलसिताँ हमारा By Somya Tripathi

कॉलेज रीयूनियन में सब इंडिया आर्मी में अब कप्तैन बन चुके रोहित को बधाई दे रहे थे जो की विदेश से लौटे रवि को अच्छा नहीं लग रहा था .. वो अपनी बड्कियां मारने लगा  ..  
“विदेश में कितनी सफाई रहती है,  लोग कितने सभ्य होते है .. इंडिया कैन नेवर बिकम अमेरिका”

“क्या वहाँ छोटे बड़ों का आदर करते हैं?” संजय ने पूछा

“यहाँ आज भी घर में माँ परिवार में सबको खिलाकर ही खुद खाती है” अजित ने कहा ..

रवि चुप हो गया और सब मुस्कुरा के बोल उठे  ..  सारे जहान से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ।

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तिरंगे के रंग by Kush Vaghasiya @kush052

गणतंत्र दिवस के मौके पे स्कुल का स्टेज नन्हे फूलों से गुलज़ार था | गीत शुरू हुआ….

“सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा..”

नन्हे बच्चों की प्रस्तुति ने हमारी अतुल्य संस्कृति को और भी खूबसूरत बना दिया

अब्बु की आँखे लाडले ‘इक़बाल’ को ढूंढ रही थी | नन्हा इक़बाल दिख गया, केसरिया  कपड़ो में…
अब्बु की मुस्कान एक पल के लिए थोड़ी फीकी हुई |

“मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना .. हिंदवी है हम, हिंदुस्तान हमारा ||”

उनके चहेरे की चमक लौट आई | अब्बु ने ‘काफ़िर’ केसरी रंग को अपना लिया |
रंग मजहब की दीवारे तोड़, ‘तिरंगे’ के हो गये

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एक तस्वीर ये भी By Shikha Saxena

26 जनवरी….
प्रभात फेरी निकालते …सुंदर, सुसज्जित बच्चे… तिरंगा लिए जोश में चले जा रहे थे ..देशभक्ति के गीत गाते हुए …
सबकी नज़रें उन पर थी ….लेकिन मेरी उस छोटी लड़की पर जो सामने झुग्गी में रहती थी …आँखों में भाव लिए ..काश मैं भी इनके साथ होती..मुझे अंदर कहीं झकझोर गया ..
इसे अभी एक तिरंगा खरीद कर दूँगी ..
लेकिन वो एक पल था बस, जो शायद इतना महत्वपूर्ण नही ..
रात अचानक याद आया …अरे! मैं तो भूल ही गई
तड़के टहलते हुए उसी लड़की को झंडा पकड़े वैसे ही गाते हुए सुना …”सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा”

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आज़ादी By Brijender Singh @Brijender2105

विकास के हाथ में पासपोर्ट देखा तो नीरू ने पूछा..

“तो तुमने पक्का फ़ैसला कर लिया है .. फिर माँ पापा..?”

“नीरू .. मिला क्या अब तक यहां ? अमरीका में सारे सपने पूरे होंगें .. आज़ादी होगी .. तुम पैकिंग करो

“नहीं विकास,मैं नहीं जा पाउंगी .. और माँ पापा को इस उम्र में अकेले छोड़कर मुझे आज़ादी नहीं चाहिये..और हमारे बच्चे भी भारतीय संस्कार और परिवेश में ही बड़े हों ये हम ही ने तय किया था ना ?

खैर .. तुम्हारे लौटने का इंतज़ार करूंगी .. और वैसे भी मुझे 3 दिन बाद ‘इसरो’ ज्वाइन करना है .. ये रहा मेरा नियुक्ति पत्र ..

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एक बार फिर  By Hetaxi Maheshwari  @hetaxi1999

– “सुनों माँ मैं निकल रही हूँ ..”

– “हाँ बेटा …अकेली हैं आज …ध्यान से जाना ..”

छब्बीस जनवरी को स्कूल प्रतियोगीता में गाना गाने जा रही थी शिवानी .. खूबसूरती का दुसरा नाम .. सोलह साल का कोमल फूल .. आवाज़ और पढाई में माँ शारदा का आशीर्वाद .. “शिवानी” ..

रास्तें में किसी ने फूल को कुचला .. खूबसूरती का मुआवजा दिया उसने .. ठीक आधे घंटे बाद पास की अस्पताल में बुरी हालत में शिवानी भी निर्भया बन गई .. पास के स्कूल से गाने की आवाज़ आई ..”सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा..”

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चालाक लोमड़ी By Fayaz Girach @shayrana

लोमड़ी सब पशु-पक्षियों के देश छोड़ कर जाने के निर्णय से दुखी थी मगर चालाक भी ।

उसने सबको एकत्रित किया और एक वीडियो क्लिप दिखाई ।

क्लिप शुरू हुई ।
विदेशों में कहीं चूहे पर प्रयोग, कही गाय को काटना, हाथी को उसके दांत के लिए मारना और कहीं साँप को खाया जा रहा था ।

तभी क्लिप में तिरंगा लहराया ।

यहाँ तो गाय को माता, साँप की पूजा, हाथी को भगवान और चूहे को उनकी सवारी का सम्मान लोग दे रहे थे।

क्लिप के समाप्त होते-होते सबकी आँखे भीग गई, लोमड़ी को गले लगाकर सब एक-सुर में बोले

“सारे जहाँ से अच्छा……”

{Note From @Kuhu_bole: कुछ अलग करने की कोशिश की गई। कहानी पर थोड़ा और काम होता तो बहुत अच्छी बन सकती थी।}

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नई दिशा By Ajay Purohit @Ajaythetwit

 टॉर्च की रोशनी तस्वीर पर पड़ी और विक्रान्त को ज्ञात हुआ कि वो एक शहीद फ़ौजी के घर चोरी करने आ पहुँचा था । 

 आज राष्ट्र युद्ध की बदौलत एक कठिन दौर से गुज़र रहा था और वह…..

 आत्मग्लानि से उसका मन भर आया । वो भी एक फ़ौजी का पुत्र था । पिता के निधन व घर की दुर्दशा ने उसे देशभक्ति को ताक पर रख एक अदना सा चोर बना डाला था ।

 किन्तु आज उसका ह्रदय परिवर्तन हो चुका था । 

 ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा…..’

 दूर कहीं बजता हुआ यह गीत उसे एक नयी राह पर लिये जा रहा था ।

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विचारधारा By Ajay Purohit @Ajaythetwit

 “अश्फ़ाक !” वो दम तोड़ चुका था ।

“चलो पंडित, भागो, जान बची तो जहान है” लियाक़त ने अमर को समझाया । 

 रेल का सफ़र अमर के लिये सदमे से कम ना था । अपनों का बिछोह और अश्फ़ाक की बहन नज़्मा से हुए प्रेम का अंत !  आज़ादी के नाम पर हुए दंगों ने सब छीन लिया था । 

वर्षों पश्चात, पंडित अमरकान्त के पौत्र चरण ने जब अपनों के विरूद्ध खड़े हो, उनके मित्र लियाक़त की पौत्रि रूह से विवाह किया तो पंडित जी फ़ूले ना समाये । 

 उन्हें गर्व था देश की असाम्प्रदायिक विचार धारा पर । 

 ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा…..’

{Note From @Kuhu_Bole: एक सड़क और विचारधारा : ये दोनों कहानियां मजहब या धर्म से परे एकता की मिसाल देती हैं। सधी हुई भाषा, डायलॉग बेहतरीन हैं। }

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अफ़सोस By Siddhant @Siddhant01

– भाई! बड़ा बुरा लग रहा है यार…

– क्यों, क्या हुआ?

– कुछ खास नहीं…
वो आज फिर कुछ सैनिक सरहद पर शहीद हो गए | अच्छा नहीं लगता ये देखकर या सुनकर… मन बड़ा दुखता है यार |

– लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं?

– सच कहा! आखिर हम कर भी क्या सकते हैं…
बस! कुछ मोमबत्तियां जला सकते है, एक दिन देशभक्ति के गीत सुन सकते हैं या फैशन में गालों पर इंडिया का टैटू बना सकते हैं |

– लेकिन जो भी हो, एक बात तो है… “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा”

– खैर! हनी सिंह का शो पे चलना है न.. सुना है सनी लियॉन आ रही है |

{Note From @Kuhu_bole: ये कहानी मौजूदा वक्त का आईना है। युवा बेशक बेपरवाह दिखते हों पर हनी सिंह के गानों को एन्जॉय करते हुए भी देश के बारे में सोच रहे होते हैं। }

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सियाचिन फ़तह By Ankita Chauhan

तापमान -40 डिग्री, कोहरे में लिपटे बादल…वहीं बर्फ की पहाड़ियों के बीच घुटनों पर रेंगती एक परछाई आगे बढ़ रही थी…उसकी सांसे जैसे गले से निकलकर होंठों पर जम गई…एक-एक कदम मानो मीलों का सौदा था…उसने गर्दन घुमाकर पीछे देखा..अपने 26 साथियों के अस्थाई बंकर से काफी दूर पहुँच गया था वह…दिल में एक संशय था..एक हल्की-सी पशेमानी.. “कहीं मैं भी एक तारीख बनकर न रह जाऊँ..?” लेकिन तिरंगे के सामने उठता हुआ सिर..उसके हिलते हुए विश्वास को फिर प्रज्वलित कर गया।

“सारे जहाँ से अच्छा…हिन्दोस्तां हमारा” तभी सामने से आती गोलियाँ उसके आस-पास बिखरी बर्फ को लाल कर चुकी थी। 

{Note From @Kuhu_bole: ये कहानी पढ़ते हुए तस्वीर बनती जाती है जहन में। भाषा बहुत अच्छी है, प्रभावी लगी। }

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मेरा नाम करेगा रोशन By Pawan Goyal @kesariyadesi ♠♣♥♦

विवेक की चार महीने पुरानी चिठ्ठी का मिलना रामकृष्ण के लिए किसी अचंभे से कम न था…

डियर अप्पा,
…. अम्मा कैसी हैं? …. पासिंग आऊट परेड़ में आप दोनों आये नहीं?? ……जानता हूँ, आप चाहते थे कि मैं सिलिकॉन वैली जाकर देश का नाम रोशन करूं। …. ईश्वर ने चाहा तो देश के साथ साथ आपका नाम भी रोशन करूंगा एक दिन। …..नाराजगी छोड़ दो अप्पा।

जल्द आता हूँ 
आपका कन्ना

विवेक सामने दीवार पे लगी तस्वीर में मुस्कुरा रहा था, जैसे कह रहा हो कि ‘कर दिया न आपका नाम रोशन’.. तस्वीर के बगल में टंगा शौर्य चक्र (मरणोपरांत) मानो कह रहा हो  “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा”

{TOP STORY OF THE WEEK as selected by @kuhu_bole : सबसे अच्छी कहानी – इस कहानी में वे सारी चीजें मौजूद हैं जो इसे पूर्ण करती हैं। बेहतरीन प्लॉट, ड्रामा, डायलॉग और इमोशन भी हैं। माता-पिता की स्वाभाविक चिंता और बेटे का देश के लिए बलिदान। थीम के साथ पूरा न्याय करती है ये कहानी। }

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पागल कौन? By Rahul Tomar @rahulshabd

 १५ अगस्त २३००

आगरा के पागलखाने में कुछ पागल स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे। देशभक्ति से ओत प्रोत गीत गा रहे थे। कुछ आज़ादी की महत्ता समझा रहे थे। पागल खाने के ठीक सामने एक कॉलेज था, कुछ दफ्तर थे। जहाँ कोई चहल-पहल नहीं थी। बस कुछ छात्र और दफ्तर के कर्मचारी थे जो

इन्हें देखकर हंस रहे थे, फब्तियां कसे जा रहे थे।

 एक विदेशी पर्यटक ये देखकर अचंभित था। उसे पागलखाने के लोग दुरुस्त और बाहर के लोग पागल नज़र आ रहे थे। तभी एक छोटा सा बच्चा ये गाते हुए गुज़रा  .. सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा..

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त्यागपत्र By Navneet Mishra @micromishra

“यहाँ क्या है? वही ग़रीबी, भ्रष्टाचार। जान भी लगा लो तो तरक़्क़ी नहीं कर सकते।“

“रमेश नहीं रूकेगा, अरे जब बाप की नहीं सुनी तो”

…चाचा की आँखें नम हो गयीं।

“चलो…बाप के क्रिया करम में तो आया।“

“बाबू, हज़ारों साल से हम ज़िन्दा हैं, ज़िन्दादिली के साथ! कुछ लोग भगोड़ा होत हैं, हम तो लड़त हैं!” मल्लाह के खैनी वाले दातों ने बिजली गिरा दी।

रमेश ने फ़ोन किया “सुधा! … मैंने रिजाइन कर दिया है… फ़्लाइट टिकट कैंसिल कर दो”

मल्लाह चप्पू के संगीत में गुनगुना रहा था…सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ..

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2 Comments Add yours

  1. felt honoured when I came to know..our stories .. our words read by KUHU ji.
    one of the best writer as well as person by heart.
    thank you for making time to read us.. appreciate us. all smiles 🙂

  2. kush052 says:

    सभी कहानियाँ अच्छी थी |
    पवन जी को उम्दा कहानी के लिए बधाई 🙂
    अजय जी, अंकिता जी, शिखा जी और वरुण जी की कहानियाँ भी प्रभावी लगी |
    शुक्रिया कुहु मेम & टीम आज सिरहाने 🙂

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