Week 10 : Ek Shaam Ki Daastaan

Dear Class of 2016 .. you make me proud and how .. All of these stories are sharp .. I loved reading them.. I loved losing myself in mini worlds weaved in just 101 words.

Mithelesh has been very kind. As a special treat for all of you, there is detailed feedback for all stories in the end. Read yours and others and see what makes a story stand out. I thank Mithelesh for taking out time and giving useful feedback we can all must learn from.

Aaj Sirhaane is one of its kind. Rejoice in the stories. Rejoice in learning. Remember to tell me which one is your favorite story.

– Anuradha


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लम्हे By Mohammad Rizwan

@rizwan1149

अच्छा सुनो… कहाँ मिल रहे हो…… जवाब जानते हुए भी नेहा ने उत्साह पूर्वक पूछा।

वहीँ अपनी पुरानी और फेवरेट जगह.. देव ने जवाब दिया।

मुझे पता था तुम यहीँ बुलाओगे…अच्छा बताओ यही जगह फेवरेट क्यों है?

बस.. शायद यह कायनात हमें अपनी तरफ खींचती है।

देखो… पैरों को छूकर लहरें जो लम्हे चुरा ले जा रही हैं। उस दिन तुम तो नहीं आई थीं मगर… ऐसे सारे लम्हे इन लहरों पे सवार चले आये थे।

देव शायराना अंदाज़ में नेहा के दिल पर अपने प्यार का एक और अध्याय लिख रहा था। दूर समुन्दर में डूबता शाम का सूरज उनके उभरते प्यार के लम्हों का गवाह बन रहा था।

 *****

अकेला by Kush Vaghasiya

@kush052

मैं समन्दर की चौखट पर बैठ वड़ापाव में रोटी का स्वाद ढूंढ रहा हुँ | हर पल टकराते अजनबी चेहरों के बीच मुझे किसी परिचित चहेरे की आशा है, जो मेरे होंठो की रूठी मुस्कान को मनाने आएगा|

वैसे इस अनजान शहर में भी कोई है, जिसे मैं जानता हुँ, बचपन से | दिनभर तो वो ऊँची इमारतों के पीछे कहि गायब रहता है और शाम को जब मैं उससे मिलने जाता हुँ तो वो खुदगर्ज़ कहीं दूर क्षितिज की गोद में सोने चला जाता है |

सच कहते थे मेरे गाँव के लोग, की शहर में सबकुछ बदल जाता है…. रिश्ते भी |

*****

वो हसीन शाम By Aruna P Khot

@arunapk57

वो रोज़ शाम समुन्दर किनारे जाती और दोहराती  दो साल पहले की वो शाम जब दोनों मिले थे आखरी बार, अचानक सारे सपने तोड़ कर उसे छोड़ कर चला गया था। अचानक छोड़ गया था और अचानक आज मिलने आ रहा था। उत्सुकता बढ़ रही थी। क्या वो आयेगा? आया भी तो क्या सब पहले जैसा होगा? वो आया डूबते सूरज की रौशनी के साथ। उसे हैरानी हुई दो साल बाद भी सब कुछ पहले जैसा ही था। दो साल जैसे एक पल में गुज़र गये। आज डूबता सूरज भी खुश था दोनों को एक साथ देख कर।

 *****

 चौपाटी चिटचैट By Fayaz Girach (♠♣♥♦ Top Story Of The Week)

(Also selected by Nirav Mehta for Photographer’s Choice.)

@shayrana

 “वोह तीनों कौन है?”

“भाई हैं, माँ की किस्मत लिखने बैठे हैं।”

 “वह दंपति ?”

“निःसंतान हैं, इलाज करवाने से शर्माते हैं।”

 “और वह दोनों ?”

“गे हैं, समाज के डर से यहाँ मिलते हैं।”

 “और वो चारों ?”

“नशेड़ी, देश के दीमक हैं”

 “ह्म्म्म्म, वोह परिवार कितना ख़ुश-हाल हैं।”

“वो अस्ल में मोर्चा निकालने वालें हैं 100 ₹ में।”

 “और वह युगल ?”

“प्रेम-विवाहित हैं, ‘VHP’ और ‘RSS’ से भागते फिरते है।”

 “और वह खड़े लोग ?”

“पत्रकार हैं, समाचार बना रहे हैं।”

 “छोड़ो, चलो चलते है, कल मिलेंगे नये मुद्दों से।”

 ‘शाम’ को देश का आईना दिखाकर…’सूरज’ ढ़ल गया।

 *****

दायरे By Pawan Goel (Third Best Story – Shared)

@kesariyadesi

जैसे समंदर और किनारा प्रकृति की सीमाओं से बंधे थे वो दोनों भी बंधे थे अपने रिश्तों में।

एक दूसरे का हाथ थामे देख रहे थे, लहर की बेचैनी और किनारे की बेबसी। लहर किनारे से हर बार टकरा कर लौट जाती थी, किनारा वहीं छूट जाता था…अकेला।

समाज के बंधनों की ड़ोर से जकड़े हुऐ हर शाम मिलते थे, फिर लौट जाते थे अपने अपने घर।

समाज के बांधे पति, पत्नी के उन रिश्तों को जीने के लिए…

उनके नाम भी जैसे उनकी जिंदगी के परिचायक थे।

“सागरिका और साहिल”

सूरज भी लौट ही रहा था अपने दायरे में।

 *****

दृश्यम्  By Ajay Purohit

@ajaythetwit

एक तस्वीर ना मिली, जिसे वो ‘परफ़ेक्ट पिक्चर’ का ख़िताब दे, फ़ोटोग्राफ़ी कॉम्पीटीशन जीत सके । अंतत: ‘मैरीन ड्राइव’ पहुँच, क्षितिज पर डूबते सूर्य की पृष्ठभूमि में ‘प्रॉमिनेड’ पर जीवन के कैनवास को देख, शिखर को जीत का एहसास हुआ । 

 यही थी ‘परफ़ेक्ट पिक्चर’।

 मिसेज़ ब्रगेंज़ा भूल नहीं पातीं जब पीटर को ले वे इसी ‘प्रॉमिनेड’ का हिस्सा बन जाती थीं । कितनी सहजता से उसने लिख दिया ‘मॉम, वी आर सिटीज़न्स हियर नॉउ । सी यू सून’ । 

 अब उन्हें केवल डूबता सूर्य नज़र आता है । ना वो रौनक़, ना प्रेमी युगल व ना ही वो परिवार । 

 प्रकृति व मानव, कहीं आशा तो कहीं निराशा !  

 *****

आखिरी बार By Varun Mehta

@funjabi_gabru

“अरे तुम !! कैसी हो ?? यहाँ कैसे ?”

“कुछ नहीं, छुट्टियां थी तो घूमने आ गयी।”

“मैंने तुम्हें कितना फ़ोन किया .. बिजी रहती हो ..”

“हम्म”

“याद है, यही मिले थे हम आखिरी बार”

“हम्म”

ख़ामोशी..

“कुछ भी तो नहीं बदला, वही किनारा, वही लहरें”

“हम दोनों के बीच सब बदल गया है..”

“मुझे माफ़ कर दो, तब हिम्मत नहीं थी, पर अब .. अब मैं तैया.. “

“मैं शादी कर रही हूँ”

-ख़ामोशी..

“क्या हम यहाँ थोड़ी देर और बैठ सकते हैं ? मैं तुम्हारे साथ ये सनसेट देखना चाहता हूँ .. एक आखिरी बार और”

 *****

रीयूनियन बाय दी बीच By Aditya Rampalliwar

@rampalliwar90

कॉलेज के दोस्त जो अब किसी MNC में नौकरी कर रहे हैं, बीच पर ढलते सूरज का आनंद लेते हुए…

राहुल: ये बरिस्ता ये कैफ़े ठीक है मगर बारिश में भीगते हुए “दादा” की टपरी की चाय का मज़ा ही कुछ और था ।

प्रवेश: वो एक ही सिगरेट को बचा बचा कर फूंकना..

सुरेश: और वो हॉस्टल से रात को दो बजे खाने की तलाश में निकलना, उसके आगे ये पिज़्ज़ा फेल है ..

आलोक: मगर हम सब तो अब भी वही हैं .. हॉस्टल के दिनों को अभी वापस जी लेते हैं, ये देखो एक ही भेल और एक ही सिगरेट ..

 *****

शाम किनारे By Shikha Saxena

@shikhasaxena191

  • तुम मेरे जीवन की खूबसूरत शाम हो
  • वो कैसे
  • शाम सबको मिलाती है तुम्हारे साथ मैं खुद से मिल जाता हूँ
  • लेकिन मैं तो धूप बनना चाहती हूँ जो उजाले बिखराती है ..शाम तो बस कुछ पल की ही रहती है उसके बाद फिर ….
  • उजाले में तो हर कोई साथ देता है …धूप से रोशनी के जो टुकड़े छूट जाते है शाम उन्हे सितारे बना देती है और आसमान अपने पास रख लेता है अपने आँगन को रोशन करने के लिए .अँधेरों में ..तुम वही हो मेरे लिए …

सितारे झिलमिलाने लगे थे आसमान में भी और उसकी आँखों में भी …

 *****

शाम के हमसफर … By Shikha Saxena (Second Best Story)

@shikhasaxena191

60 साल ..वो उम्र जब एक हमसफर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है इनसे भी ज्यादा ..

अपने आस-पास बैठे कई नौजवान जोड़े देख कर सोच रहे थे अकेले बैठे जतिन …

एकाएक नज़र थोड़ी दूर बैठी एक महिला पर पड़ी ..शाम का सिंदूरी रंग समुंदर के सीने से उतर कर उसके चेहरे पर चढ़ा जा रहा था..

एक अजनबी को एकटक घूरते देख अचकचा गई ..जतिन झेंप कर उठ गये और वो भी …

लेकिन अगले दिन नही ..

मुस्कुराई वो ..और जतिन भी

शाम के कारवाँ में दो हमसफर और जुड़ गये थे ..

 *****

लाल रंग By Syed Aatirah (Third Best Story – Shared)

(Selected for AAJ SIRHAANE DISTINCTION . Is kahani ki maasuumiyat seene mein teer sa utar gayi.. kuch chubha to nahi magar peed hui.. dard hua .. Simple story, marvelous characterization and commendable writing.)

@syedaatirah

माँग में सिंदूर, मंगलसूत्र और सलवार कमीज़ पहने शाम की वाक पे कौन जाता है .. पर मैं ऐसी ही हूँ .. श्रृंगार का बहुत शौक है मुझे .. बीच के पास आज भीड़ ज्यादा है .. खूबसूरत जोड़े.. प्यार में डूबे हुए .. डूबते लाल सूरज को अलविदा कह रहे है..

मैं मुस्कराने लगी .. फिर ना ज़ाने क्या याद आया .. गालों पर कुछ गर्म लकीर सा ढलक आया ..

ये इश्क़ का कौन सा रंग है की पत्नी बनते ही प्यार के मतलब बदल जाते है .. क्यूँ अपना बना लेने के बाद क़द्र नही रहती!

खैर जाने दो ..

 *****

*****

 


 

FEEDBACK FROM GUEST EDITOR, MITHELESH BARIA

लम्हे – A decent story, there is a reference to the “us din” in the story, that is something to ponder about. I see an indirect proposal of a shy guy, who cannot express his love directly, beautiful. What I like about this story is that words are simple and so are the thoughts. Sometimes only the love is remembered in life, the moments we spend in love. This story talks about the moments when the love is just few days, few more meetings away. Anyone can relate to this. Samundar mein “doobta Sooraj” and “ubharte pyaar”, see how beautifully these opposite meaning words are used at the end.

 अकेला – I liked the way the words “har pal takraate ajnabi chenron” are used. A simple five line story which says it all, flawless except a few words here and there. I would have loved if a relation between both the characters would have been touched upon a little more, that extra line would have added more meaning to this story. Justice has been done to the picture, but there was more scope.. only the first line links with the picture… But only 5 lines, and so much thoughts conveyed… simply great…

वो हसीन शाम – A story of two persons meeting after everything had ended, the fact that he left suddenly has been mentioned but why ?? , perhaps in the end this point again could have been brought back. Something like “ aaj doobta sooraj bhi khush tha un donon ko ek saath dekh kar, wo bhi shaayad uske jaane ki wajah poochna bhool gaya” . This would have added a proper end to the story. But no flaws in the way it has been written.

चौपाटी चिट-चैट – This is what i call professional writing. You know what this story does, if you read it again you will realise that this story covers all the charactres in the picture. Imagine !! all of them, including the Sun. And while covering the characters, harsh realities are put on your face with abrupt force. Any comment on this story would be very small. Simply superb… The writer should write more… Hats off… Professional stuff… I rate this story No. 1 for all the reasons mentioned above.

(Special Note from Photographer, Nirav Mehta: I loved reading all the stories. I have no idea who wrote the story named, “Chowpatty Chit-Chat” but it connected to me so well. Our world is full of people who are multi diverse in nature and yet live their life in fear of getting judged. But so well written that it just connects to your heart instantly.)

दायरे – I rate this No. 3. Beautifully written, husband and wife are being compared with the sea shore and the waves. The hidden pain comes out beautifully in the story. The end line is cherry on the top. The writer knows his/her skills and has concentrated on that. The way the first three lines are written, will make anyone feel that the story has something coming.

दृश्यम् – Unfortunately, I was not able to understand the story. No comments.

आखिरी बार – The ending line “ek aakhiri baar aur” is something I loved about the story, ..Good story. With due respect to the beautiful flow of the story I just wonder whether their meeting was by chance.. or somehow planned… loved reading this…

रीयूनियन बाय दी बीच – This is not a story, this is something a person feels about. The writer has expressed his feelings with these lines, this is the story of you me and everyone, everyone goes through this.. readers would relate.. but then they would have loved it with a pinch of story too. I would call this a description of phase more than a story.

शाम किनारे – A poem I must stay, an expression of love, a beautiful expression. the way it has been left incomplete at the end is simply awesome…. “shaam” ka jikr hai … “samandar” ka bhi karte to maza aur aa jaata… picture ka description or behtar hota .. par behad sundar..

शाम के हमसफर – I would rate this story 2nd best. What a beautiful story, it has everything. A twist, a background, a different aspect of the society and an ending. “the” is used for Jatin instead of “tha”, interesting and unique. I like the story, doesn’t come down heavily on you, relaxes you when u flow along with it. Good. This story is an example of , how a very complex thing can be written very simply.

लाल रंग – I would rate this story 3rd best. It depicts the unsaid things of life, the silently understood realities. I like the “hat ke” side of the story. See the description of the woman, a slight twist and the story takes you somewhere else.

 

6 Comments Add yours

  1. Fayaz Girach says:

    Crying after reading the compliments.
    Would like to share this with Sidhhant.
    @Sidhhant01 i learnt from his style of story telling.

    Thank you Mithelesh Sir for your valuable time. You inspire lakhs of people, i am one of them.

    Kudos to one of the finest photographers Mr. Niraav. The photo itself is so inspiring that i can go on writing….

    Last but not the least, SKB who introduced me to this world of words.

    -Fayaz Girach @shayrana

  2. bahut khoob…very beautifully written by all…different perspective..what a range…kudos to all..

  3. Aditya rampalliwar says:

    Thanks to Mithelesh sir for sparing time and reading all these stories.. Aaj Sirhaane is doing a fabulous job… Motivates me to write and write better everyday… thank you.

  4. Aditya rampalliwar says:

    Thanks to Mithelesh sir for sparing time and reading all these stories. Aaj Sirhaane is doing a fabulous work. I will learn and try to write better in coming days..

  5. “शाम” ..जितनी खूबसूरत ..उतनी ही खूबसूरत तस्वीर और उतनी ही खूबसूरती से लिखी हुई कहानियाँ ..और उस पर मिथिलेश जी के शब्द …क्या कहने
    ये सब कहाँ मिलेगा आज सिरहाने के अलावा …शुक्रिया इन सब के लिए

  6. kush052 says:

    बहुत खुबसूरत कहानियाँ, हर सप्ताह कुछ सिखने को मिलता है, शुक्रिया मिथिलेश साहब, आपके शब्द के बड़े मायने है…
    “टीम आज सिरहाने” आप कमाल हो 🙂

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