बुरा न मानो पीके है .. By Abhi & Pawan

t4g

Writers: By Abhi Leel & Pawan Goel (Rangeeli Toli No. 3)

चारों तरफ रंग उड़ रहे हैं, उन्ही के बीच एक चेहरे के भी रंग उड़े हुए हैं। उसे शायद ये समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है। ये सब लोग बौरा क्यों गए हैं? ख़ुशी तो है कोई न कोई जो सबके चेहरे से नज़र आ रहा है पर ऐसी कौनसी बात है?

तभी एक चुलबुली सी लड़की एक हाथ में पानी की बाल्टी और दूसरे में रंग भरी पिचकारी लेकर दौड़ती हुई उसकी तरफ आई। वो घबरा गया, लगा जैसे धड़धड़ाती हुई राजधानी एक्सप्रेस आ रही है और उसका पाँव पटरी में फँस गया है।

“अरे रुको रुको !! हमका जीने दो देवीजी। हम कछु नाही किया।” डरी हुई आवाज़ में पीके ने गीता को रोका।

“हैं ?? या कै बोल रया सै तू?” गीता ने ऊपर से नीचे पीके के अजीब पर बिना रंग लगे हुए कपड़ों को देखते हुए पूछा।

“यार ई गोला पे भी लोग कईसन कईसन पगलेट हरकत करता है” पीके ने भुनभुनाते हुऐ गीता से कहा। 

“बावळा हो गया है के, किसी बहकी बहकी बातां करण लाग रया है, पीके है के??” गीता बोली। 

“अरे हाँ, पीके ही हूँ हम, आपको कईसन मालूम?” पीके की आँखें और चौड़ी हो गई। 

“इसे भौंडे रंग बरंगे लत्ते तो पीके ही पहरा करे सै और किसी बावळी बूच के बस की कोण्या” गीता ने हंस कर कहा। 

“पर ये सब लोग एक दूसरे पर पानी काहे डाल रहे हैं, देखिए तनिक चेहरा भी कैसा रंग बिरंगा कर दिये हैं??!!”

“सुण रै खड़े कान वाले बांदर, कदे होळी न खेली तन्ने?”

“होली? ई का होवत है?”

“रै आसमानी बांदर होळी मस्ती अर खुशियाँ का त्वाहर स, लोग लुगाई एक दूसरा पै पाणी गेरा करें स और रंग लगावें स”

“इ तो पानी का भैसटेज हुआ??” पीके के चेहरे पर असमंजस था। 

“बावळी बूच घणा असहिष्णु मत हो, मजे के लिए थोड़ा घणा एडजस्ट करणा पड़े स” गीता झल्लाते हुए बोली। 

“मज़ा काहे का। अभी रंग लगाएगा फिर रंग उतारेगा। इ गोला पर पानी ही नहीं बचेगा अईसन चलता रहा तो। ई तो… ई तो रॉंग नंबर है।”

“ओ सुण रै ‘स्नेक आॅन द मंकी शैडो’, कुछ अच्छा करण त दाग लागे तो दाग अाच्छे हैं। चल घणा सत्यमेव जयते मना करे इब ठा बाल्टी और सरू होज्या।”

“पर पहले एक ठो होली पोज में फोटू तो होइए जाब”

पीके भी होली के रंग में रंग चुका था।


By:

Abhi Leel @DhuanDhari 

Pawan Goel @kesariyadesi

2 Comments Add yours

  1. ajaypurohit says:

    Wow ! 😄😄😄👏🏽👏🏽👏🏽 बहुत ख़ूब अभि & पवन । मज़ा आ गया ।

  2. kush052 says:

    एक सिम्पल कहानी जिसमे दो प्रादेशिक भाषाओ का तड़का और कुछ पंच है, कहानी थोड़ी बिखरी हुई लगी…
    पर मुस्कान बिखेरने में कामयाब 🙂
    अच्छा प्रयास था…

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s