होर कै चल रया सै? By Ajay & Sandeep

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By Ajay Purohit & Sandeep Bhutani (Rangeeli Toli No. 1)

आईये आप को मिलवाते हैं, राष्ट्र के २ नौजवानों से – राधेश्याम और दुलीचन्द ! हरियाणा के गाँव से हैं दोनों । कहने को तो पढ़े लिखे, पर कॉलेज पार ना कर पाये, अत: बेरोज़गार । यूँ इन्हें रोज़गार की आवश्यकता नहीं, क्यों कि खेत खलिहानों से अच्छी कमाई हो जाती है,  पिता, चाचा और ताऊ की कठिन मेहनत की बदौलत ! 

 चलिये सुनते हैं, गाँव के पीपल के नीचे आपसी हाल-चाल जानने के बहाने, इन की बातचीत… 

 ‘भाई के चल रया सै?’

‘टीवी पर तो बोलै फोग चल रया सै’

‘फोग’ ? 

‘हाँ भाई, छोरा छोरी लगावै सै ना, वो क्या कवैं डीओ’

‘हाँआआआ…..डीओ, पर भाई डीओ चलण लग्या?’ 

‘बावळे, दुनिया डिजिटल हो गयी सै, ऐसा बतावैं सारा कुछ चलण लाग रया सै’

‘होर कै चल रया सै’

‘ना पूछ – वो गली वाला ताऊ बोल्या आन्दोलण चल रया सै’ 

‘यो कै होवे भाई’ ? 

‘ना समझ्या भाई, लठ चल रहै सै, मारा-मारी चल रही सै, आगज़नी, लूट-पाट…..पर यो आन्दोलण ना दिखै ।’ 

‘भाई ये सब किस ख़ातिर ?’ 

‘वो क्या कवैं आरक्षण लेण की ख़ातिर चाल रया सै ये सब ।’ 

‘भाई, आरक्षण ?’ 

‘हाँआआआ… आरक्षण, कोई महँगी चीज़ सै । इस की ख़ातिर सारा बवाळ हो रख्या है ।’ 

‘भाई ठीक सै, इब समझ्या, ये सारा रस्ता जाम कर रख्या है कि कहीं जे आरक्षण मिल जावै तो भाग ना ले । भाई, होर के चल रया सै?’

‘सुण, कोई होर काम-धंधा ना सै तन्नै’

‘भाई, सुण्या तेरी शादी की बात चल रई सै’

‘रै बावळे, बापू दहेज माँग रया सै तो छोरी का बाप कमाऊ छोरा – ना होवै रिश्ता । अच्छा तेरा के होया?’ 

‘भाई, मन्नै छोरी पसंद आ गयी’

‘हाँ तो फिर….?’

‘फिर के था भाई…छोरी फिर गई… उसने मैं ना आया पसंद’

‘लो बताओ, के कमी सै भाई थारै म्हारै में… रैहण दे, होर आयेगी भतेरी’ 

‘सही बोलै भाई….होर कै चल रया सै?

‘रै मूरख, ढोर-डंगर, हवा-पाणी, लोग-लुगायाँ चाल रै सै, सरपंच जी बतावैं राजनीति चाल रई सै, रेडियो बोलै दंगा-फ़साद चाल रै सै, एक ना चल रया है तो वो है ये पीपळ का पेड़, देस में भाईचारा होर थारै म्हारै जीवण की गाड्डी ! इब समझ्या के ना !’ 

ये थे हमारे राधेश्याम और दुलीचन्द .. अब हमारा प्रश्न है पाठकों से .. होर कै चल रया सै?


By:

Ajay Purohit @Ajaythetwit

Sandeep Bhutani  @dogtired1

2 Comments Add yours

  1. कविताएँ लिखते-लिखते कहानी और कहानी लिखते-लिखते कामेडी ..:) और ये सब बस आज सिरहाने का मंच ही करवा सकता है …बहुत मजा आया लिखने में भी और सबकी कहानियाँ पढ़ने में भी
    शुक्रिया

  2. kush052 says:

    एक अच्छी कहानी जिसे और भी बहेतर कर सकते है, कॉमेडी के नजर से देखे तो ये फ्रेम सबसे ज्यादा स्कोप रखती है, मुन्ना & सर्किट…
    कुछ पंच लाजवाब थे साथ में एक सामाजिक संदेश और अभी के हालात को भी पिरोया गया जो इसे खास बनाता है 🙂
    किसी कॉलेज नाटक की स्क्रिप्ट जैसी थी ये स्टोरी, बढ़िया 🙂

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