Week 13 : The Wisdom Of Our Follies

बेवकूफी

सेल्समेन By Mohammad Rizwan

@Rizwan1149

शोरूम में हमारे प्रवेश करते ही एक १५-१६ साल का लड़का आगे आया।

“आईये दीदी किया देखेंगी सूट या साड़ी?”

“साड़ी दिखाओ… पार्टी वियर…”

थोड़ी ही देर में एक के बाद एक कई साड़ियों का उसने चठ्ठा लगा दिया।

“इनमे से आपको कोई पसंद नहीं”? उसने पूंछा

काउंटर पैर बैठे मालिक ने जैसे हमारे मूड को भांप लिया।

 “बेवक़ूफ़ लड़का है ग्राहक के हिसाब से चीज़ नहीं दिखाता… मोनिका, तुम देखो मैडम को किया चाहिए…”

“साहब बेवक़ूफ़ नहीं हूँ… हाँ बेवक़ूफ़ बनाना आपसे सीख रहा हूँ…।”  बुदबुदाते हुए वह लड़का अलग हट गया।

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कोम्प्रोमाईज़ By Kush Vaghasiya

@kush052

{Aaj Sirhaane Distinction} {Guest Editor Appreciation}

ख़ामोश कमरा बहुत शोर कर रहा था… विवेक हाथ में अख़बार लिए खुद से ही कुछ सवाल पुछ रहा था | उसकी आँखों में चार साल पुराना एक मंजर तैर रहा था |

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“बोलो न विवेक, कब करेंगे हम शादी..”

“निशा मैं तुमसे प्यार करता हूँ पर मैं अभी शादी नहीं कर सकता”

“विवेक मेरे घरवाले मेरे लिए रिश्ता ढूंढ रहे है”

“सॉरी निशा, मैं अभी अपने करियर से कोम्प्रोमाईज़ नहीं कर सकता”

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फड़फ़ड़ाते अख़बार ने मंजरनामे को रोक दिया, उसमे आज लाल जोड़े में निशा की तस्वीर थी जिसने अपनी स्युसाइड नॉट में लिखा था…. “तुम सही थे, कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहिए !!!”

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मदद By Ajay Purohit

@Ajaythetwit

‘काहे बौराय रहे हो बे इतना’

‘क़सम से, तुम्हरा गला दबोच दें, सोच रहे हैं’

‘का हुआ भाई….?’

‘अबे, बोले थे ना तुम, कि ११ शनिश्चर उपवास और पत्नी से छुटकारा’

‘हाँ तो ..?’

‘११, छोड़ के इ १४ वा है, ओका तो कुछ ना बिगड़ा, हमरी जान निकल गयी’

‘का कह रहे हो, चलो वापिस बाबा बंगाली के पास’

‘बाबा यहाँ से कूच कर गये हैं बच्चा, नोटिस बोर्ड पर अपनी समस्या का समाधान पढ़ लें’

‘यह मंत्र केवल आप की सेहत व दिमाग़ की शान्ति के लिये था, बेरोज़ग़ार की मदद करने का शुक्रिया’

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सारे जहाँ से अच्छा By Mohammed Kausen

@mohdkausen

“पापा आप रहीम चाचू से बात मत करना।”

“क्यों सूरज बेटा? उन्होंने तुम्हे डांटा?”

“नही…।”

“फिर….?”

“क्योंकि वें मुस्लिम है।और मुस्लिम भारत माता से प्यार नही करते।”

“ऐसा किसने बोला तुम्हें ?” रमेश ने हैरान होकर पूछा।

“टीवी पर बोल रहे थे।”

रमेश 7 साल के बेटे से ऐसी बातें सुनकर अंदर तक हिल गया। उसने बेटे को तो समझा दिया पर खुद उलझ कर सोचने लगा कि कैसे मीडिया अपनी बेवकूफी भरी बातों से हमारे देश को तोड़ने की नाकाम कोशिश में लगा है। टीवी को इडियट बॉक्स बिल्कुल सही कहा गया है..

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राज़ By Fayaz Girach

@shayrana

“ऑफिस से जल्दी लौट आना श्रीमती माल्या.. “

आकाश अपनी पत्नी, धरती से कह रहा था।

ये जानते हुए भी, के आज ऑफिस में छुट्टी थी। उसने, गगन के संदेश, धरती के मोबाइल में पढ़ लिए थे। लेकिन धरती की ख़ुशी की ख़ातिर वो बेवक़ूफ़ बनता रहा। इन दोनों का संबंध, क्षितीज की तरह हो गया था। आकाश ने ये सच कभी धरती को नहीं बताया, क्यूँकि वो जानता था शायद…..।

धरती की सहेली, बरख़ा, उसे रोज़ अपने प्रेमी “आकाश माल्या” के रोमांचक किस्से सुनाती थी।

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अप्रैल-फुल By Fayaz Girach

@shayrana

पारिवारिक विरोध के बावजूद

वो गाँव से निकली थी।

उसने रॉकेट की तरह, कम वक़्त में, अपनी लगन से, बुलंदियों को छुआ।

नाम और पैसे दोनों कमाये।

शोहरत का रंग लग गया।

उलझती गई।

भोली थी, शहर के तौर-तरीके समझ देर से आये।

शायद बड़े ख़्वाब देखने की, बड़ी क़ीमत भी चुकानी पड़ती है।

-जब ख़बर सुनी तो लगा कोई उल्लू बना रहा है। पर हक़ीक़त थी।

-रिश्तें, ज़िन्दगी भर उसे बेवक़ूफ़ बनाते रहे और वो आज ज़िन्दगी को अप्रैल फुल बनाकर चली गई।

(आनंदी को श्रद्धांजलि सुमन।)

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बेवकूफ़ियों वाला बचपन By Vishal Kumar

@rafiology

{Guest Editor Appreciation}

–    क्या कर रहे हो?

–    पेंसिल छिल कर दूध में रख रहे दो दिन में रबर बन जायेगा – तुम भी बनाना ..

–    ये क्या है ?

–    ये पेंसिल बैटरी इसमें आवाज़ आता है-तार ऐन्टेना लगा कर रेडियो बनायेंगे फिर गाना सुनेंगे।

–    तुम बेवकूफ क्या क्या करता है.. चलो खेलने कंचे।

–    नहीं तुम जाओ हमको मम्मी बोली उसमें कीड़ा होता है अन्दर फूट कर काट लेगा .. हम तो सिनेमा देखने जायेंगे और पता लगायेंगे की कैसे हम भी तेज दौड़ते दौड़ते बड़े हो जायें ।

–    ऐसा होता है क्या ?

–    बस पढ़ने से थोड़ी सब होता है बेवक़ूफ़ .. किताबों के बाहर किताबें बहुत है ।।

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देशभक्ति By Hetaxi Maheshwari

@hetaxi1999

सवेरे छे बजे आहना और चाचू को जाप करते देख ताज्जुब से वजह पूछी और तगडा जवाब आया .. “आज सेमीफाइनल है ना ।”

पांच साल की बच्ची देश की जीत के लिए उत्कृष्ट थी ..!! युं ही सही देशभक्ति ज़िंदा रहेगी।

शाम को सब टीवी के सामने बैठे और राष्ट्रगीत शुरू हुआ की मैं थपाक से सावधान हो गई। चाचू ने सवाल किया “क्या हुआ ?” आहना हस कर बोली “यह स्कूल नहीं हैं”  मैं हिली नहीं .. चाचू ने चैनल बदलते हुए ठहाके में कहा “बेवकूफ! शायद अब बैठ जाए ।”

मैं मुरझा कर बैठ गई .. देशभक्ति की तरह ..!!

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दो सौ की जेब By Hetaxi Maheshwari

@hetaxi1999

{Aaj Sirhaane Distinction}

– खाना कब मिलेगा ?

– बस कपडे धो कर देती हूँ ..

– तु धो रही है ? कामवाली ?

– हज़ार रुपए कह रही थी ..

– हज़ार हो या दो हज़ार .. उसे निकाला क्यों ?

– कल तेरी जेब में दो सौ रुपए थे .. सिर्फ !! शादी कर ले बस .. फिर सास-बहु सब कर लेंगे।

– हाँ .. पर तु कामवाली रख ले , पैसों का इंतजाम कर लूंगा ।

– दिनभर मेहनत करता है .. जाने बेवकूफ के पैसे कहाँ जाते हैं ।

रोहन के फोन पर मेसेज आया “योर चेक हेज बीन डिपोजिटेड इन ए चाइल्ड कैन्सर होस्पिटल” और दो सौ की जेब में से दो लाख निकल गए।

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ट्रेन फ़्रेंड By Ajay Purohit

@Ajaythetwit

{Guest Editor Appreciation}

‘अरे रे….सँभल !’ जीन्स, टॉप व खुले बालों वाली ख़ूबसूरत लड़की ने उसका हाथ पकड़ा तो उसे लगा कि ‘लोकल ट्रेन’ का पहला सफ़र सफ़ल !! रूपेश को, कुर्ला जाने वाली ७:३६ की इस लोकल में अपना भविष्य दिखाई दिया ।

नमिता से बातचीत का सिलसिला कब मित्रता में बदला,  पता ही ना लगा ।

‘…होने दो अम्माँ प्रेमा का विवाह, हमें कोई चिंता नहीं’ रूपेश ने बात समाप्त की ।

‘कहाँ थीं इतने दिनों?’

‘अब मैं माटूँगा से आती हूँ, कल मॉम से मिलना था सो इस ट्रेन में, क्यों क्या हुआ?’

अब वो समझा कि मुंबई मे ‘ट्रेन फ़्रेंड’ किसे कहते हैं !

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निशानी By Shikha Saxena ♠♣♥♦ 

@shikhasaxena191

{Top Story Of The Week} {Aaj Sirhaane Distinction}

एक अजीब सी खामोशी थी घर में, उदासी भरी …जिसे कोई भी नही चाहता …

अचानक भाई माँ का संदूक उठा कर लाए …धीरे-धीरे सब सामान निकालना शुरू किए ..

जिसको जो चाहिए ले सकता है ..बोले

और सामान बँटने लगा उनकी निशानी के रूप में..

तुम कुछ नही लोगी ? भाई ने पूछा मुझसे..

तुम लेने में कोई भी बेवकूफी मत करना ..पति ने फुसफुसा के कहा

“बिलकुल नही”…सोचते हुए मैंने माँ की एक पुरानी टूटी ऐनक निकाल ली ..

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लाटरी By Varun Mehta

@funjabi_gabru

{Aaj Sirhaane Distinction}

–    भाई, ये देख , मनोहर कहानियाँ के साथ स्क्रैच करो और जीतो सौ करोड़ !!

–    सच, दिखा ??

–    अरे हां, मैं तो 10 मैगजीन उठा लाया, चल स्क्रैच करे।

–    913457 …ओह माय गॉड.. भाई .. हम करोड़पति बन गए
यार, गोवा, बियर और लड़कियां, पूरी मौज ..

–    मैं तो माँ के लिए घर और पापा को कार खरीद के दूंगा ..

–    अब तो सब होगा यार.. बस एक फ़ोन करना है, फ़ोन निकाल ..

२ घंटे बाद..

“कृपया लाइन पर बने रहे, आपका चार्ज 2565 रूपये

४ घंटे बाद

“कृपया लाइन पर बने रहे, आपका चार्ज 5015 रूपये

सुना है दोनों 48 घंटे तक फ़ोन पर बेवक़ूफ़ बने रहे ..

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बेवकूफ़ By Sandeep Bhutani

@dogtired1

{Guest Editor Appreciation}

पिछले 22 सालों से लगातार बिना नागा ज़िन्दगी के 8 घंटे सरकार को लगान स्वरुप दे रहा हूँ . लगान क्या – चाकरी है, न कोई लाग  लपेट और न ही फल की इच्छा. शाम 6 बजे दफ़्तर से निकलते ही अंतर्मन का सूर्योदय होता है.

न तीन में न तेरह में, न दुनियादारी की परवाह, न ऊंचा उड़ने की ख्वाहिश. न ग़लत सोचा न बुरा किया. ज़िन्दगी की दौड़ में पैदल मैं भी शुमार हूँ. लेकिन अपने आस-पास लोगों की रफ़्तार से डरता हूँ क्योंकि लोग समझाते हैं – बेवकूफ़ी न कर, बहती गंगा में हाथ धो ले.

बेवकूफ़ हूँ या बेवकूफ़ी कर लूँ.

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यक़ीन By Jagrati Mishra

@Jagrati_mishra

आदित्य ! आज तुम्हारी दवाओं का अंतिम दिन है, पूरी तरह ठीक हो तुम ।

आदित्य के खुश होकर बाहर जाने के बाद उसके पिता ने डॉक्टर रघु से विस्मय में पूछा-       बेटा ! अइसी कऊन वाली दवा दीन हौ कि फायदा कर गई ? अबै तक कउनो दवा मा या बात ना रहै !!!

 डॉक्टर रघु ने हँसते हुए कहा-  काका रघु को ये वहम हो गया था कि उसे कोई खतरनाक बीमारी है…..मैंने उसे साधारण सी मीठी गोलियाँ दी, और यकीन दिलाया कि दवायें असाधारण हैं….. बस ।

काका मुस्कराये और हाथ जोड़कर बाहर चले गये ।

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कर्मो का फल By Mohammed Kausen

@mohdkausen

{Aaj Sirhaane Distinction}

“क्या कुछ नही किया हमने उसके लिए।”

“वो हमारा फ़र्ज़ था जी।”

“तो उसका कोई फ़र्ज़ नही? क्या इसी दिन के लिए उसे पढ़ा लिखा कर कामयाब किया था ……? कि एक दिन वो हमें ही बोझ समझने लगेगा।”

“वो जल्दी ही हमें ले जायेगा।आप दुःखी ना हो।”

मालती ने पति से ज्यादा खुद को तसल्ली दी।

“क्या तुम इस आश्रम में खुश हो .. तुम्हे दुःख नही मालती ?”

“ये हमारे कर्मो का फल है जी .. काश……इस बेटे की चाह में हमने उस बेटी को गर्भ में ..”

“बस चुप हो जाओ मालती .. आगे मत बोलो”

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बेकूफ कौन By Ashish Mishra

@justalovelythou (You can listen to story here.​)

{Aaj Sirhaane Distinction}

 “बूझता नहीं है, बोले एक बार की बेकूफी नै करो…. मैदान पार मज्जिद में जाके गोली खेल के आया है… ” .. कलिया का बाप उसे पीटता रहा गालियों के साथ |

कलिया रोते रोते सो चुका था, आधी रात में उसकी नींद खुली और उठकर उसने खिड़की से मस्जिद की तरफ देखा | कुछ देखकर भागा और अपनी माँ को नींद से उठा कर बोला, ” माई, बाबू हमको बोले बेकूफी नै करने के लिए और खुद्दे इतना रात में चच्चा सब के साथ जुम्मन और सरतजवा के घर में घुसे हैं, लाठी लेके…. उ भी कम बेकूफ नै हैं !”


NOTES FROM GUEST EDITOR Abid Zaidi @abidzaidi1

Out of the total 12 stories… Five were exceptional… these five are :

1st : Nishani

2nd : Bewakoofiyon waala bachpan

3rd : Train Friend, Compromise, Bewakoof

 

 

Nishani touched a chord deep inside… A mere sentence says so much… Selection of Mother’s ‘tooti ainak’ by a daughter, implies that she has opted for her mother’s vision…her nazariya…the gentle kind look that only a mother can give to her child…the ‘mamta’ is so visible in the eyes… #Excellent

Bewakoofiyon waala bachpan has a magical touch… The innocence of childhood which believes in fairies and simplicity of magic..


 

NOTES FROM AAJ SIRHAANE TEAM

The stories this time were a mix bag ..  the one that were superior than others have a common element.. they were all simple.. they don’t look pushed to be the best.. which is why they have an easy flow and come across as genuine..

I would like to highlight these stories that have excelled this week:

कोम्प्रोमाईज़ : Aaj Sirhaane Distinction for the craft of writing. Beautiful and effortless.

दो सौ की जेब : Aaj Sirhaane Distinction for out of the box thinking.

लाटरी : Aaj Sirhaane Distinction for comic writing and punch. Makes a simple story so interesting to read.

निशानी : Aaj Sirhaane Distinction for superb craft, well defined climax. A complete story that goes beyond the word limit.

कर्मो का फल : Aaj Sirhaane Distinction for touching a chord without preaching on the topic.

बेकूफ कौन : Aaj Sirhaane Distinction for writing and use of local dialect. adds personality to a simple story.

Anuradha


 

 

 

2 Comments Add yours

  1. शुक्रिया #आज सिरहाने ..इस मंच के लिए .. जिस पर लिखना खुशी दे जाता है मुझे
    एक “बेवकूफी” शब्द पर कितनी अलग-अलग कहानियाँ ..लोगो की सोच, उनका नजरिया, जीवन के प्रति दृष्टिकोण, सब नज़र आ जाता है और बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है ।

  2. Mohammad Rizwan says:

    Bewakoofi me chupi samjhdariyan or kisi lalach me ki gayi bewakoofi or aise hi kai trah ki or bhi bewaqoofiyan…sabhi kahanaiyan padh kr maza aya…

    Shikha ki kahani “Nishani” behtreen pako mubarakbaad
    Doosri kahaniyan jo dil ko chubhi
    “Karmon ka Phal” by kausen
    “Bewakoof kon” by Ashish
    “Do Sau ki Jeb” by Hitexi

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