Week 14: Ummeed Ki Udaan

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गुल्लक By Jagrati Mishra ♠♣♥♦

@Jagrati_mishra

{Stories Of The Week – First}

“क्या डाल रहा है ठाकुर जी की गुल्लक में ? “
“कुछ नहीं…”
“देखूँ ! क्या है ….”

इतना कहकर मौली ने कीकू के हाथ से काग़ज़ का टुकड़ा छीन लिया जिसपर कुछ आड़ी तिरछी रेखायें थीं..

“क्या लिखा है इसमें ?”
“माँ….”
“तो ?”
“दादी कहती हैं कि भगवान की गुल्लक में जो डालो, ज़रूर मिलता है ..”
“अच्छा……जा .. डाल दे…… “

“मौली भरी हुई आँखों के साथ इतना ही कह सकी .. कीकू ने कागज़ गुल्लक में डाला और इस उम्मीद से उछलता हुआ चला गया कि .. एक दिन उसकी गुज़री हुई माँ वापस ज़रूर मिलेगी…!!

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उड़ान by Fazal Abbas

@fazlabas  

 {Aaj Sirhaane DistinctionOut Of The Box Thinking}

गौरी को उसकी कालेज की सहेलियाँ कोकिला और मैना, गौरैया कह कर बुलाती थीं।

शायद गौरी का नाम दोनों ने सोचकर बिगाड़ा था। तीनों 12वीं कक्षा की साइंस की छात्रायें थीं। लड़के इनको देखते तो उड़ने का शब्द हवा में किसी न किसी गाने की धुन में गूँज जाता।

एक दिन गौरी ने ख़बर सुनी कि भारतीय वायु सेना की तीन पहली युवतियाँ फ़ाइटर प्लेन पायलट चुनी गयी हैं और ट्रेनिंग में हैं तो उसने अगले दिन कोकिला और मैना को भी बताया।

“मालूम है, पर हम कहाँ उड़ा सकेंगे।

 गौरी बोली .. “अरे ख़ुद थोड़े उड़ना है। सीख कर उड़ायेंगे ना ..”

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लड़ाई By Ritu Dixit

@espiritz_

{Stories Of The Week – Second} {Aaj Sirhaane DistinctionMotivational}

आज फिर रोई थी वो। कमरा बंद कर ज़ोर ज़ोर से बिना आवाज़ करे। कोई सुन न ले।
सुन कर हो भी क्या जाएगा।
यह तो रोज़ का क़िस्सा है। बस अब जीना सीख लिया था उसने इसके साथ। 
कभी लगता था ट्रेन पकड़कर भाग जाए कहीं। एक दिन तो चूहे मारने की दवाई लेकर बैठ गई। फिर सोचा कितनी कड़वी होगी, फेंक दी। 
रोते-रोते उस वाक़ये को याद कर हँसी आ गयी उसको। अचानक लगा, जब हँस सकती हूँ तो लड़ क्यूँ नहीं सकती। 
उठ खड़ी हुई, साड़ी का पल्लू कमर में खोंस, अपनी उम्मीदों की उड़ान भरने!

 

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पंख By Navneet Mishra 

 @micromishra

{Stories Of The WeekThird} {Aaj Sirhaane DistinctionA complete story}

“बधाई डागडर सा’ब! पी एच डी पूरी हो गयी। अब वो मेरा पोर्ट्रेट पूरा करो..”
“पूरा कब का हो गया”
“क्या? और मुझे दिखाया तक नहीं? ये क्या है तुम्हारे पीछे, दिखाओ”
पेंटिंग खुली तो माहौल बर्फ़ की तरह जम गया .. 
बादलों में नाचती हुई लड़की ..

“ले जाओ इसे, ये मेरा दम घोट देगा।”
कनिका ने व्हील चेयर के पहिए को एक तेज़ धक्का दिया। वह मुड़कर कही दूर चले जाना चाहती थी पर हाथ फिसल गया। रवि नें सम्हाला और उसका हाथ पकड़े फ़र्श पर घुटने के बल बैठ गया।

“वो उड़ने वाली लड़की तुम हो! मेरी उम्मीद भी मेरी उड़ान भी! शादी करोगी इस डागडर से?”

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बबली By Ritu Dixit

@espiritz_

 “ऐ कहाँ चल दी.. पहले जा के चार घर निपटा दे.. ‘
‘पर कल भी तो गयी थी..’
‘बताऊँ तेरे बाप को?’

स्कूल के कपड़े क़रीने से तह लगा कर, पुरानी फ़्रॉक वापस पहन चल पड़ी बबली!
तीसरे घर तक पहुँचते पहुँचते धूप भी तेज़ हो गयी थी और पेट में घुमड़-घुमड़ भी।
पर उस घर की मालकिन बहुत अच्छी थी, उसका हाल पूछती .. खाने को देती ..

‘आज फिर तेरी नयी माँ बीमार पड़ गयी?’
बबली सिर झुकाकर काम करती रही..

‘सुनो बबली, मेरी बेटी बनोगी? मेरे पास रहोगी हमेशा के लिए..
 दो जोड़ी आँखों से टप टप आँसू नही, उम्मीद की नदियाँ बहने लगी … 

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अंतिम निर्णय By Shikha Saxena

@shikhasaxena191

“कोई जरूरत नही है बाहर जाने की..”

दादी के निर्णय के आगे सब बेबस थे  .. आयुषि की उम्मीदें आँसुओं में बही जा रही थी ..  देश के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिला था लेकिन क्या फायदा..

“हमारे घर से आज तक कोई लड़की बाहर पढ़ने नही गई ..”
“लेकिन जरूरी तो नही कि जो आज तक नही हुआ वो आगे भी न हो.. आयुषि जरूर जाएगी”

हैरान आयुषि, माँ को देखती रह गई .. आज तक तो कभी मुँह ना खोला था .. खैर उस दिन दादी नाराज़ हो गयी थीं पर माँ के अंतिम निर्णय के सामने कोई कुछ न बोला

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आँगन के फूल By Shikha Saxena

@shikhasaxena191

माँ, रश्मि की आज जाकर जाँच करवा दो …
पति की बातें सुनकर काँप गई रश्मि ..कलेजा मुँह को आने लगा, मतलब समझती थी वो अच्छी तरह..
और सास से कोई उम्मीद नही थी .. जो बेटा कहेगा चुप चाप होता रहेगा .. इस घर में रश्मि की भावनाओं की कोई जगह नही थी..
नही बेटा..ये मैं नही होने दूँगी, जो भी होगा इस घर का अंश होगा ..और उसे खुशी से स्वीकार करेंगे ..
रश्मि को पहले तो विश्वास ही न हुआ

उसकी नाउम्मीदियाँ अब आँगन में उम्मीदों के नये फूल बनकर खिलने वाली थी

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नृत्य by Varun Mehta

@funjabi_gabru

{Aaj Sirhaane DistinctionWell Written}

  • क्या कर रही थी तुम छत्त पर ??
  • पता है तो बार-बार क्यों पूछते हो ??
  • तुम बात सुनती क्यों नहीं ??
  • तुम होते कौन हो रोक टोक करने वाले ..
  • पति हूँ मैं तुम्हारा
  • तो ?

चटाक !!

..
तुम ऐसे आदमी के साथ कैसे रह सकती हो ?
रहना पड़ता है
और नृत्य.. तुम्हारी कला ?
मेरी बेटी को अपने बाप की जरूरत है .. इस कला से उसका पेट नहीं भरेगा .. सब को सब कुछ नहीं मिलता जिंदगी में, अक्सर किसी का “काश” तो किसी का “अगर” रह ही जाता है 

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प्रण By  Mohammad Rizwan

@Rizwan1149

{Aaj Sirhaane DistinctionWell Written}

 “चिड़िया मुझे बना दे राम.. छोटे पंख लगा दे राम..बागों में उड़ जाऊँगी..” ६  साल की मुस्कान स्कूल से लौटी तो यही रट् लगाए थी। 
 मुस्कान की यह पंक्तियाँ कमरे में लेटे उसके दादाजी को बेचैन कर रही थीं।  
 “ऐसी ही तो थी हमारी नेहा भी.. हवाओं से बातें करने वाली..”
 “नहीं! नहीं! उसने ख़ुदकुशी नहीं की.. हमने ही जान ले ली अपनी बच्ची की “
 “क्यों कतरना चाहे उसके पर..? क्यों अपनी पसंद थोपना चाही..?”
 आँखों में पश्च्ताप के आंसू डबडबा आये ..
 “मगर अब ऐसा नहीं होगा.. यह अपनी आकांक्षाओं के आसमान में निडर उड़ेगी.. ” मुस्कान के दादाजी ने प्रण किया।

 ****

उम्मीदों की पतंग By Ruchi Rana

@RuShuVi

{Aaj Sirhaane Distinctionpoetic imagery}

मन के कोलाहल में ,इक मौन छिपा है ,उसका क्या ?

मेघा के दिल  में जैसे अमावास उतर आया.. उम्मीदों के टूटे किरचे बिनती रही. ख्वाहिशें यूँ खामोश गुज़र गयीं .
सहसा उसने देखा  कितने दिनों से जक्वार्ड के इन  भारी पर्दों को खोला नहीं है ,गर्दिशों की धूल की परत में दबे हैं ये .
एक झटके से पर्दों को किनारे किया, देखा खिड़की पे रखे  लैवेंडर की लम्बान में इज़ाफ़ा हुआ है, फूल दिखे हैं उम्मीदों के .
पसीजे हुए लम्हों को करीने से लगा ही रही थी की उसके मन के एक टुकड़े आकाश पर उम्मीदों की पतंग ऊंची उड़ चली!

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नियति By Ajay Purohit

@Ajaythetwit

 ‘पंछी बनूँ उड़ती फ़िरूँ मस्त गगन में…..’ एक प्रेरणा स्रोत था यह फ़िल्मी गीत उसके लिये । पंछी बनने की तमन्ना किंतु ना ही पर, ना ही स्वच्छंद आसमान ! 
 मोहिनी को चाय के बाग़ान से आगे निकलने की कोई राह दिखाई ना देती । 
सुंदरता व आत्मविश्वास की कमी ना थी उसमें । शहर से आये सैलानी जब भी तस्वीर खींचते तो उसे उनके कैमरों मैं क़ैद होना बेहद पसंद था । 
 ‘आई लाइक दिस गर्ल, अ परफ़ेक्ट मॉडल फ़ॉर आर न्यू कैम्पेन उड़ान’ 
 पंछी उन्मुक्त गगन में अपनी प्रथम उड़ान भरने को उन्मुक्त था । 

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 ख्याली पुलाव By Shubham Bais

@Subm_

 रेडियो पर सर्व शिक्षा अभियान की घोषणा सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान खिल गई, पढ़ाई-लिखाई, पुस्तकें, स्कूल और ना जाने क्या क्या ख्याली पुलाव पकने लगे।

“आशा, कपडे धुल गए क्या .. जल्दी कर .. अभी बर्तन भी मांजने है।”

आशा मन मसोस कर कपड़ों पर साबुन रगड़ने लगी ..

वो भी जान चुकी थी कि किताबों से दिमाग भरा जा सकता है .. पेट नहीं

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प्यारी सबा by Rahman

@dost_rahman
यार मिर्ज़ा ये डाक्टरी का भूत दिमाग़ से निकालो बिटिया के हाथ पीले करो और अपने कंधों का बोझ उतारो..

यह हमारा ख्वाब है भूत नहीं और बेटियाँ बोझ नहीं होती .. फ़ख्र होती है ..
प्यारी सबा की डबडबाई आँखें देख कर मिर्ज़ा साहब ने कहा और सबा का हाथ थामे आगे बढ़ गये…
कुछ महीनों बाद अख़बार में सबा की कामयाबी के चर्चे थे..
शुक्रिया अब्बा कह कर सबा मिर्ज़ा साहब से लिपट कर रो पड़ी
मिर्ज़ा साहब के चेहरे पर ग़ज़ब का सुकुन था ..

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 अधूरी उड़ान By Amit Rawat

@amitrawatt001

“माँ,  देखो आज मैंने स्कूल में ईनाम जीता और सभी ने मेरे लिए खूब तालियाँ बजाई” शीला के चेहरे पर ख़ुशी छलक रही थी

अरे वाह,ऐसे ही पढना मेरी लाडो .. माँ ने बोला
“सुनो ये पढ़ना बंद करो .. मैनें इसके लिए एक लड़का देखा है और दो दिन में इस बोझ से छुटकारा मिल जाएगा”  मदन ने लड़खड़ाती आवाज में कहा ..

मदन के डर से दोनों चुप थे मगर जैसे शीला चिल्ला रही हो.. आखिर क्यो..??? अभी तो मैंने उड़ान भरनी शुरु की थी मगर आपने तो पहले ही मेरे पर काट दिए…वो

जानती थी कि उसकी ये उडा़न अधूरी ही रह जाएगी..!!

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रोटी से टोपी By Hetaxi Maheshwari

 @hetaxi1999

हर्ष : अगर काव्या खाना बनाएगी तो मैं नहीं खाउंगा ।
काव्य : हाँ .. हाँ .. मत खाना। माँ भैया अक्सर चिढाते है मुझे नहीं बनाना खाना ।
माँ : बनाना पडेगा नहीं तो सीखेगी कैसे ?
काव्या : मुझसे जैसा होगा वैसा बनाउंगी फिर ..
माँ : तू जैसा मर्ज़ी बना .. कच्चा-पक्का – मैं खा लूंगी।
पापा : काव्या क्यों बनाएगी खाना ? उसे तो अफसर है बनाना ।
काव्या : हाँ पापा .. बनूंगी ना मैं अफसर “रोटी से टोपी तक के सफर की उडान भरूंगी ..!!”

****

विलंबित उड़ान By Anuradha Sharma

@sai_ki_bitiya

{This Story is not part of the competition. }

बावन साल की विमला जी, कॉलेज के टेक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्स की सबसे बड़ी स्टूडेंट थी .. रोज़ कोई न कोई “ओ एम् जी .. व्हाट इज़ शी डू-इंग हियर.. सच ऐ स्नेल’ कह कर नाक भौं सिकोड़ता .. नंबर भी कुछ ज्यादा ख़ास ना आते ..

खैर तीन साल के कोर्स के बाद विमला जी पास हो गयी थी…. मगर सब के भद्दे मज़ाक सुन कर भी वो हंस क्यूँ रही थी ..
मैंने पूछा आपको बुरा नहीं लगता विमला जी ..

वो हंसती हुई बोली .. पैंतीस साल पुराना सपना था  .. कभी पैसे, पिता, पति और फिर बच्चों के कारण पूरा नहीं कर पायी थी .. पर देखो पूरा कर ही लिया ..

अपनी डिग्री दिखाते हुए विमला जी फिर से बच्चों सा हंसने लगीं ..

****


Notes From Guest Editor, Abid Zaidi

Again an amazing set of stories ranging in all human flavours..

Best Story: Gullak. The fascination attached to Gullak/ Piggy Bank…the childhood belief that there’s a fortune…a magic waiting to happen…This fascination & belief leading to the expectation that maybe ‘Maa’ bhi shayed mil jaye !! The relativity is refreshing as well. Birds in the sky and the mother descending from the sky… who is a happy soul as evident from the ‘flying’ posture… Everything is great about this story..

Second: Ladai – Loved the positive attitude… Going from one end of emotion to the other through self pep-talk was great .. Aasmano me udne ka confidence… aur khud ko motivate karna ..

Third: Pankh .. Suspense…happy suspense… bilkul sapno jaisa… and it was well written.

 


Notes From Aaj Sirhaane Team

Stories could have been better. Some stories were well thought of but not well written, others were well written but with no real conflict. A story –  especially a short story – without a conflict & resolution are bland. Good Luck for next time.

Anuradha

8 Comments Add yours

  1. बेहतरीन कहानियाँ ..👏👏
    बहुत कुछ सीखने को मिलता है इस मंच से ..हमेशा बरकरार रहे ये

  2. Pradeep Shukla says:

    Very nice….
    पूरी दुनिया बदलने से पहले
    पाँव घर से बाहर तो निकले
    वर्षों से खींचीं गयी हैं जो लकीरें
    उन रिश्तों के जाल से तो निकले
    प्रदीप

    1. AS says:

      Wah wah .. likha kijiye hamare saath 🙂

  3. Navneet Mishra says:

    स्वयं पढ़ते हुए किसी की कॉपी चेक करना बेहद कठिन है। यहाँ सबने अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का परिचय दिया है। हर एक कहानी को पढ़ कर सोचता हूँ- ऐसा भी हो सकता है!🤔🤔

    1. AS says:

      Thank you, May EKESES mein phir aapka intezaar rahega.

      – AS Team

  4. Mohammad Rizwan says:

    Apne safar me #AajSirhaane ne phirr udaan bhari… #ASMandali ne pankh lagaye ummed ke.

    Kahaniyan पंख aur नृत्य bahut achi lagi.

    Likhne ki koshishen sabhi ki mubarakbaad ki haqdaar hai.

    Meri kahani “PRAN” ko appreciate krne k liye SKB ko dhanyavad. Ummeed nahi thi iss bar apni kahani se.. ek aan subject lag raha tha…phir bhi pasand kiya gaya… ek bar phir shukriya 🙂

  5. Jagrati Mishra says:

    All stories are amazing. I like Antim Nirnay by shikha saxena most. SKB’s Vilambit Udaan is the best and thank god ! Not part of the competition.
    Thank u as mandli …..for reading.
    Thank you guest editor.

    1. AS says:

      Thank you!

      – AS Team

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