14 Comments Add yours

  1. Archana Aggarwal says:

    बेहतरीन

    1. Alka Saklani says:

      शुक्रिया Archanaji 🙂

  2. sacredheartsip says:

    एक अधूरी नज़्म हम सब की डायरी में होती है.. आपकी नज़्म ने वो पन्ना पलटने के लिए मज़बूर कर दिया

    1. Alka Saklani says:

      हाँ वो वक़्त गुज़र जाता है तो फिर उसे पूरा करना मुश्किल हो जाता है. प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया

  3. hetaxi maheshwari says:

    Bahut badhiya .. 🙂

    1. Alka Saklani says:

      शुक्रिया Hetaxiji 🙂

  4. अति सुंदर|अभिनंदन!
    गुज़रे सालों में सब, हाँ सब गुज़र गया है|मेरा प्यार,मेराजुनूं यहाँ तक कि चैहरा भी बदल गया है|
    सबकी ज़िंदगी की, बल्कि ज़िंदगी की सही तस्वीर है,आपकी कविता!
    साधुवाद!

    1. Alka Saklani says:

      शुक्रिया रक्ष जी

  5. शिशिर सोमवंशी says:

    अधूरेपन में ही पूर्णता है कई नज़्मों की और ज़िन्दगियों की भी।

    1. Alka Saklani says:

      सही कहा शिशिर जी. प्रोतसाहन के लिए शुक्रिया.

  6. Aditya rampalliwar says:

    The last para… reality.. gr88 🙏

  7. ekbanjaara says:

    Adhoori nazm se jude hue jazbaat bahut hi khoobsurati se bayan kiye gaye… bahut umdah.. waah..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s