7 Comments Add yours

  1. वाह क्या चित्रण किया है!! ऐसा प्रतीत हुआ कि मैं पहली बार मिली हूँ इन सखियों से….बहुत वास्तविक वर्णन…अद्भुत….

  2. Vimal Kishore Rana says:

    बहुत सुंदर। रूपक अलंकार को भी अलंकारित कर दिया आपने। अपने विचारों को कागज़ पर पूरी तरह बिखेरेने में माहिर है आप। हार्दिक बधाई।

  3. Vimal Kishore Rana says:

    Again Preet ji, excellent abstract. You are a painter with a kalam.

    1. preetkamal22 says:

      Thank-you Vimalji, itna maan dene ke liye shukriya ! Kavita hai hi itni khoobsurat!

  4. शिशिर सम्बंधी says:

    एक ख़ूबसूरत ख़याल को बेहद ख़ूबसूरती से पिरोया है कविता में। प्रीतकमल की भूमिका भी प्रभावी है।

  5. mohdkausen says:

    शिवानी जी कविता पढ़कर बहुत अच्छा लगा I आपकी अलंकारिक और कल्पनाओ से सुसज्जित भाषा कमाल की है। बहुत खूब !

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