Best of Sukhan : March 5, 2017

Mehfil-e-Sukhan : March 5, 2017
Mentor : Koshish Ghazal
Selected Two Ghazals

il_570xN.372428398_ifaxBest of Swalekh – Entry #1
Writer : Supriya @SacredHeartSip

ज़िन्दगी को मेरी मुझको ज़िन्दगी की आदत है
शिक़वा, ग़िला न मुहब्बत, फ़क़त रवायत है

एक शाम थी जो ताकती थी कभी राह मेरी
कुछ दिनों से उसने भी करी मुझसे बगावत है

तेरी आँखें रात गहरी, बिंदिया चाँद अधूरा सा
तेरी जुल्फें बहता दरिया, चाल उफ़्फ़ क़यामत है

सच को फेंक, अखबार को खोल, ले चाय की चुस्की
खबरों का ये खेल भी देखो जैसे कोई सियासत है

कही होली के रंग में भंग, कहीं ग़म ही मसर्रत है
कहीं बहती हैं मय की धारा, कहीं पानी भी हसरत है

एक अधूरी तेरी कहानी लिखे न कोई रोशनाई
सफ़हा-ए-दिल भी मेरी “पाक़ीज़ा” ज़रूरत है

Best of Swalekh – Entry #2
Writer : Fatima @FatimaKolyari

वो दर्द जो ज़िन्दगी की राहों को आहत कर देता है
किसी का महफूज़ साया सुकून इनायत कर देता है

तन्हाई में सुबकते लम्हों से हैरान दिल-ए-इज़्तिराब
गुज़रे हुए हसीं पलों से मरहम-ए-रहमत कर देता है

तसलसुल-ए-आह-ओ-फुगां से वाबस्ता है जीस्त
आह-ओ-दर्द गोशा-ए-दिल को नाताकत कर देता है

मुन्तज़िर है उसके आगोश की पनाह में जाने को
उसके महकते अहसास का ख्याल राहत कर देता है

बेवफा करार करें उनको तो तौहीन-ए-इबादत होगी
बेइंतेहा मुहब्बत खुदाया दर्ज़ा-ए-इबादत कर देता है

2 Comments Add yours

  1. वाह जी , बहुत सुंदर

  2. आजसिरहाने मंच और कोशिश सर का दिल से आभार.. दुआ है ये मंच यूँही फलता रहे और हमे कोशिश सर से और भी सीखने को मिले 😊🙏🙏

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