Lakshaaki : Supriya

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24-oct-2016, 9:30 p.m

मेरा नाम लक्षाकी है.. मैं 14 साल की हूँ और नवमी कक्षा में पढ़ती हूँ । मेरे पापा लक्ष्य और माँ कीर्ति.. कभी उन्होंने ने बड़े प्यार से अपने नामो के सम्मिश्रण से मेरा नाम रखा था अब जो की उन्होंने अलग होने का फैसला लिया है तो क्या मेरे नाम का भी विभाजन हो जायेगा? वो दोनों एक दूसरे से प्यार नहीं करते, एक दूसरे के साथ रह नहीं सकते इसलिए बिना ये सोचे कि मेरा क्या होगा दोनों इस घर से जा रहे हैं।

माँ ने आज सुबह कहा, मैं अब से उनके साथ रहूँगी और पापा उनसे झगड़ पड़े ये कहते हुए कि उनकी बेटी सिर्फ उनके साथ रहेगी। किसी ने मुझसे पूछा भी नहीं मैं क्या चाहती हूँ।

कल स्कूल की ड्राइंग कम्पटीशन में परिवार की पिक्चर ड्रा करनी थी जिसमे मैंने पापा की तस्वीर बनायीं थी मुझे गोद में बैठकर माँ को अपने हाथ से खाना ख़िलाते हुए, आज उसका रिजल्ट निकला  और मुझे फर्स्ट प्राइज मिला । असल में तो ये बस मेरा सपना है, मुझे तो ये भी याद नहीं हमने कब एक साथ खाना खाया था और अब शायद ये सपना कभी पूरा होगा भी नहीं।

25-oct-2016, 10:30 p. m.

आज स्कूल में  ऋषभ बहुत खुश था, उसके पापा की दूसरी शादी हो रही है, किसी और को कोई कैसे माँ के सकता है? पर उसकी माँ का तो देहांत हो गया शायद इसलिए वो कह सकता है पर मैं नहीं कह सकती.. पापा शिल्पी ऑन्टी से शादी कर लेंगे और शायद माँ भी उन से जिनसे वो अक्सर फ़ोन पे बात करती हैं.. पापा तो हमेशा से ही शिल्पी आंटी को पसंद करते थे, वो शिल्पी आंटी की सुंदरता से लेकर उनके काम करने के तरीके तक माँ की उनसे तुलना करते रहते हैं। फिर उन्होंने माँ से शादी क्यों की? आज शिल्पी आंटी कुछ ज्यादा ही प्यार जता रही थी,मुझे वो बिलकुल पसंद नहीं। वो कितना भी मुझे बेटा कह ले पर वोमेरी माँ नहीं, मैं उन्हें कभी माँ नहीं कहूँगी चाहे कुछ भी हो जाए।

26-oct-2016, 9:00 p.m.

आज घर पे कोई नहीं है.. न माँ, न पापा.. आज फिर हमेशा की तरह मैंने अकेले ही खाना खाया। एक पुरानी एल्बम मिली माँ-पापा की शादी की। दोनों कितने खुश नज़र आरहे थे। कुछ मेरे जन्म की तस्वीरें भी थी उसमें भी दोनों कितने खुश थे.. शायद वो हमेशा से ऐसे नहीं थे। फिर अब क्यों ऐसे हो गए। ऋषभ कहता है प्यार और शादी दो अलग बातें हैं पर इसमें अलग क्या है.. जब हम किसी से प्यार करते हैं तो ही तो उससे शादी करते हैं? माँ-पापा की भी तो लव मैरिज थी.. दादी ने बताया था मुझे.. जब तक दादी थीं तब तक तो सब ठीक ही था.. याद है मुझे मेरे पांचवे जन्मदिन पर माँ-पापा ने कैसे सरप्राइज दिया था एक बड़ा सा टेडी जो मुझे माँ-पापा की आवाज़ में कहानी सुनाता था। क्यों माँ-पापा अब अलग हो रहे हैं?

बुआ भी आई थी आज.. वो मुझे कुछ दिन के लिए अपने पास ले जाना चाहती हैं.. पर इससे क्या बदलने वाला है

27-oct-2016, 11:00 p. m.

आज ऋषभ अपनी स्टेप मदर से मिलने गया था.. कितना खुश था वो.. वो तो अभी से अपनी स्टेप मदर को ‘मोम’ कहने लगा है। मैं शिल्पी आंटी को कभी माँ नहीं कह पाऊँगी। वो मेरी माँ नहीं हैं.. आज पापा ने मुझे भी शिल्पी आंटी के घर ले के गए। जैसे वो पहले भी ले जाते थे और हमेशा की तरह मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा। शिल्पी आंटी ने कभी शादी नहीं की, बुआ कह रही थी वो कॉलेज टाइम से पापा को पसंद करती थी मगर पापा को माँ पसंद थी। कल मैं बुआ से मिलकर बात करुँगी.. क्यों ऐसा हो रहा है, क्या अभी भी माँ पापा एक साथ हो सकते हैं? शायद कोई रास्ता हो, बुआ भी तो नहीं चाहती के वो अलग हो जायें

28-oct-2016, 9:30 p. m.

आज माँ-पापा ने शिफ्टिंग की है.. एक दो दिन में शायद हम इस घर को छोड़ देंगे और पता नहीं मैं किसके साथ रहूँगी..मैं बुआ से मिलने भी गयी थी ,

बुआ कहती हैं माँ-पापा एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। उनकी शादी और दादी के देहांत के बाद पापा पे बहुत कर्ज़ चढ़ गया था और एक दिन पता चला के मेरी किडनी में प्रॉब्लम है और उसको ट्रांसप्लांट किया गया.. मुझे किडनी शिल्पी आंटी ने दी.. उसके बाद पापा और क़र्ज़ में डूब गए। पापा दिन रात मेहनत करते थे और शिल्पी आंटी उनके बिज़नस में पार्टनर थी.. माँ मेरा और घर का ध्यान रखती।

उसी के बाद पापा और माँ के बीच में दूरियां बढ़ने लगी और पापा शिल्पी आंटी के करीब होने लगे।

तो क्या माँ-पापा के दूर होने का कारण मैं हूँ?

परसो माँ-पापा की वेडिंग एनिवर्सरी है.. बुआ और मैंने सोचा है उनको सरप्राइज देंगे और बीते हुए दिन याद दिलाएंगे.. शायद वो अपना इरादा बदल दें.. लेटस होप फॉर दी बेस्ट.. और माँ ने भी तो कल एक सरप्राइज देने की बात की है। आई ऍम अ बिट एक्साइटइड

29-oct-2016, 9:00 p. m.

मैं जीना नहीं चाहती… ऐसा मेरे साथ ही क्यों हुआ? हमेशा मुझसे ही क्यों वो छीन लिया जाता है जो मुझे पसंद हो। आज मैंने और बुआ ने कल के लिए सब तैयारी कर ली थी.. शाम को हम दोनों ने माँ और पापा को फ़ोन करके कल साथ डिनर करने के लिए मना भी लिया.. एक आखरी बार के लिए.. आज मैंने ब्रेकफास्ट बुआ के साथ किया.. लंच पापा और शिल्पी आंटी के साथ किया.. आज मुझे शिल्पी आंटी बुरी भी नहीं लगी, बल्कि मुझे उनसे पहली बार बात करना अच्छा लगा। और शाम को सब ख़त्म हो गया.. माँ मुझे सरप्राइज डिनर पे ले गयी ऋषभ के घर.. वो ऋषभ के पापा से शादी करने वाली हैं.. वो जानती थी के मुझे ऋषभ कितना पसंद हैं.. फिर भी.. ऋषभ भी जानता था के उसके पापा मेरी माँ से.. फिर भी उसने मुझे नहीं बताया.. क्या वो नहीं जानता के मैं उसको पसंद करती हूँ.. उसके पापा और माँ पहली बार हमारी पेरेंट्स टीचर मीटिंग में ही मिले थे.. तब भी माँ को पता था ऋषभ के बारे में…मैं वहां से चली आयी और माँ ने पुछा तक नहीं.. ऋषभ ने कई कॉल की पर मुझे उससे कोई बात नहीं करनी.. न आज.. न कल.. न कभी

30-oct-2016,11:55 p. m.

आज बुआ सुबह सुबह ही आगयी थी.. हमने बहुत सारी तैयारी की.. उन्हें बहुत उम्मीदें हैं पर मेरा बिलकुल कुछ भी करने का मन नहीं था.. माँ सुबह कमरे में आयी थी जाने सेपहले.. कह रही थी ऋषभ के बारे में बात करना चाहती थी पर सब कुछ अचानक हो गया.. उन्होंने तो मुझे डाइवोर्स के बारे में भी सब ख़त्म होने के बाद बताया.. ऋषभ के बारे में भी शादी हो जाने के बाद बताती क्या..

शाम को माँ-पापा जल्दी घर आगये.. और कमाल की बात ये थी के वो दोनों एक साथ आये.. हमने उनके पसंद के गाने चलाये.. उनके कॉलेज की, शादी की और अच्छे दिनों की तस्वीरों की फ़िल्म बनायीं थी उसे देख कर माँ-पापा रो पड़े और उन्होंने एक दूसरे को सॉरी भी कहा.. पापा और माँ बहुत देर तक अकेले एक दूसरे का हाथ पकड़ कर अलग बैठे रहे और जब उठे तो वो दोनों खुश थे.. पापा ने अपने हाथ से मुझे और माँ को खाना भी खिलाया.. आज मेरा सपना पूरा हो गया.. मैं खुश हूँ और चाहती हूँ मेरा परिवार हमेशा ऐसा ही रहे.. इसलिए… इसलिये मैंने आज खीर बनाई सिर्फ अपने और माँ-पापा के लिए, जिसे मैंने बुआ के जाने के बाद परोसा.. क्योंकि ये बस हम तीनों के लिए है…स्पेशल खीर.. माँ-पापा दोनों को खीर बहुत पसंद है और सब ख़ास मौकों पे हमारे घर खीर बनती थी और आज तो बहुत खास दिन है हम सब फिर से मिलने जो वाले हैं, हालांकि माँ-पापा कहते हैं अब ये मुमकिन नहीं पर हम अच्छे दोस्त बने रहेंगे… पर इस खीर में मैंने वो मिलाया है जिसे खा कर हम तीनों को कोई कभी अलग न कर सकेगा। देखो माँ-पापा मेरे हाथों की बनी खीर खा कर कितने आराम से एक साथ हाथ पकड़ कर सो रहे हैं.. आई ऍम सो हैप्पी.. अब मैं भी अपनी खीर खा कर आराम से अपने माँ पापा के पास सोऊँगी हमेशा हमेशा के लिए.. गुड बाय डायरी…

लेखिका : सुप्रिया 
संकलन : अग्नि परीक्षा 


फुट नोट :

इस रोचक “अग्नि परीक्षा” संकलन की भाँति ही हम अन्य ऐसे कई संकलनों पर कार्यरत हैं । यह एक ऐसा अनोखा प्रयास है जिसमें संघ समीक्षा एवं टिप्पणियों के फलस्वरूप हम कहानियों को अंतिम रूप देकर आपके समक्ष प्रस्तुत करते हैं ।
यदि आप भी इस ‘विशेष’ कहानी लेखन कार्य मे भाग लेना चाहते हैं तो हम से ईमेल के द्वारा संपर्क करें ।

-धन्यवाद
आजसिरहाने
aajsirhaane@gmail.com

5 Comments Add yours

  1. archanaaggarwal4 says:

    नन्ही बच्ची की की संवेदनाएँ , खूबसूरत कथानक

  2. Kahani kitni sahajta se likhi gayi hai. Ik bachchi ke manobhavon ka sateek chitran
    Ant mein dil dahal gaya

  3. आप सबका दिल से आभार 😊🙏

  4. aksachan6121 says:

    Nice concept …good plot for the story….nice one…keep going…do well…

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