Kahani Sankalan : Paurush

भूमिका :

नारी सदा से ही साहित्य सृजन की केन्द्र बिन्दु रही है , इसकी चाल – ढाल , हाव – भाव यहाँ तक कि नख-शिख वर्णन में भी साहित्यकारों की विशेष रुचि रही है । सौंदर्य मर्मज्ञ ये रचनाकार नारी को ही इतिवृत्त मान कर पुरुष को नितांत उपेक्षित करते रहे हैं या यूँ कहा जाए कि पुरुष मानसिकता के विविध आयामों का अंकन करने में नितांत असफल रहे हैं । इसी पक्ष को समंजित करने के उद्देश्य से हमने ‘पौरुष ‘ नामक कथा श्रृंखला को अभिव्यक्ति दी है । इसमें चित्रित पुरुष राम नहीं , रावण भी नहीं वरन मानसिक दुर्बलताओं और विशिष्टताओं दोनों को दर्शाता है । पात्रों के नाम महाभारत काव्य से लिए गए हैं , हमारे विद्व लेखकों के अत्यधिक परिश्रम का सुष्ठु फल है , पौरूष ।

तो आइए आस्वाद लीजिए हृदय के गुह्य भावों को प्रकट करतीं इन उत्कृष्ट कहानियों का ।

आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में हम सभी ..


कहानियाँ :

 

(परिचय : अर्चना अग्रवाल)

 

2 Comments Add yours

  1. Waah intro padhkar hi aanand aa gaya!! Bahut khoob likha hai Archana. Aur solah aane sach bhi!!

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