Bheeshma : Nitish Kaushik

5


सुबह के 10 बजने ही वाले थे, कचहरी में बहुत भीड़ जमा हो चुकी थी।

भीष्म कलेजा मुँह में लिए,9 बजे से ही कचहरी के बाहर खड़ा था।

10 बज गए..भीष्म की धड़कने घड़ी की टिक-टिक को पछाड़ रही थी।

जज साहब ने 10:30 बजे सीट ली।

“बनवारी लाल वर्सेज भीष्म”

नायाब-कोर्ट ने आवाज लगाई,

भीष्म दिल और खुद को संभाले कचहरी में दाखिल हुआ।

“भीष्म कौन है?” जज साहब ने पूछा।

“हुजुर मैं”

भीष्म ने कहा।

“तुम पर इल्ज़ाम है कि तुमने बनवारी लाल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाए…”

“हुजुर ये झूठ है..झूठ है..”

भीष्म ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।

“उर्वशी…उर्वशी तो मेरी बहन जैसी है जनाब..”।

“बहन और बहन जैसी में बहुत फर्क होता है भीष्म..

क्या क्या होता है दुनिया में…ख़ैर..

तुम्हें बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा..

फिलहाल ..कोई जमानती लाए हो तो तुम्हें जमानत पर छोड़ा जा सकता है। हैं कोई जमानती??”

“हुजुर..उर्वशी ही..।

  ….उर्वशी…”

भीष्म ने आवाज़ लगाई…

“नहीं भीष्म..उर्वशी नही , इस केस में उर्वशी की जमानत पर तुम्हें नही छोड़ा जा सकता..कोई और है?”

“जी..जी नही..”

“इन्हे कस्टडी में ले लो..

आपको सरकारी खर्चे पर वकील चाहिए..भीष्म?”

“जी..जी नही हुजुर..”

“अगली तारीख पर अपने वकील के साथ आना..जेलर को इत्तिला कर देना वो तुम्हारे वकील को बुला देगा…

ले जाओ”

 

बनवारी लाल के चेहरे पर सूकुन की मुस्कान तैर गई। भीष्म के होश फाख्ता थे..उसे गिरफ्तार कर पुलिस ले जाने लगी। उर्वशी ने चिल्लाते हुए कहा-

“इनका कोई दोष नही है साहब..ये मेरे भाई है..इन्हे छोड़ दो…”

“जनाब ने कह दिया न..कोई और जमानती ले आओ..जाओ बाहर जाओ अब…

रमेश बनाम चौधरी…”

नायाब कोर्ट ने कहा..!

भीष्म को वहाँ से जेल ले जाया गया।

उर्वशी और बनवारी लाल भी कचहरी से अपने अपने घर को रवाना हो गए।

उर्वशी एक 30 बरस की लड़की है और प्राइवेट बिजनेस की मालिक है, भीष्म उम्र में उर्वशी से दशक भर बड़ा है और उसी के साथ बिजनेस में हाथ बटाता है।

बनवारी लाल एक नक्काश का बेटा है और यहाँ नक्काशी का ही काम करता है। बनवारी लाल से उर्वशी की शादी हुए 10 साल हो चुके है, पर इस शादी में शादी जैसा क्या बचा था..ये शादी को ईज़ाद करने वाले भी शायद ही ढूँढ पाँए।

जेल में भीष्म को अंडर-ट्रायल्स वाले खाने में रखा गया। जाने क्या सोच सोच कर उसकी आँखे सुर्ख हुए जाती थी।

जेलर के इत्तिला करने पर वकील भीष्म से मिलने वहाँ हाज़िर हो गया।

“भीष्म, इस केस को लड़ना चाहते हो? देखो इसमें समझौता हो सकता है। हड्डी फेंको तो कुत्ता चाटने आ ही जाता है”

भीष्म के वकील ने कहा।

“वकील साहब…मुझे अपनी बेगुनाही साबित करनी है। ये इल्जाम मुझे दिन रात कचोट रहा है। मैं…मैं…”

भीष्म कहते कहते रुक गया।

“ठीक है..समझौतें से केस जल्द खत्म हो जाता..पर ये तुम्हारी मर्जी है तो ये ही सही…

अगली तारीख पर कचहरी में मिलेंगे..और हाँ..

तुम्हारा पड़ोसी जमानत देने को तैयार है.. अगली तारीख पर तुम बाहर भी आ जाओगे”

अगली तारीख पर भीष्म को कस्टडी से बुला लिया गया।

कारवाही शुरु हुई।

“जी वकील साहब कहिए..”

जज साहब ने शिकायतकर्ता बनवारी लाल के वकील से कहा।

“जनाब..बड़ा सीधा केस है। भीष्म बहुत ही बदचलन किस्म का इंसान है। उर्वशी के साथ काम करता था और कुछ समय से दोनो साथ रह रहे थे। उर्वशी बनवारी लाल के साथ विवाहित है। विवाह के बाहर भीष्म ने उर्वशी से संबंध बनाए..बस इतना सा है”

“सीधा तो है वकील साहब..पर साबित तो करोगे..

गवाह बुला लाओ अगली तारीख पर..”

“जी जनाब”

“भीष्म..तुम्हारा जमानती आ गया..?”

“जी जनाब..इसका पड़ोसी है..साथ ही काम करता है”

भीष्म के वकील ने कहा।

“ठीक..ये भाग गया तो तुम्हारी जिम्मेवारी होगी..

हर तारीख पर आना है इसे”

जज साहब ने जमानत पर दस्तखत करते हुए जमानती से कहा।

“जी हुजुर..हर तारीख पर यहाँ मौजूद रहुंगा”

भीष्म ने हाथ जोड़ते हुए जज साहब से कहा।

भीष्म के घाव पर थोड़ा मरहम सा लगा लेकिन उसकी टीस कम ना हुई। उसकी अंतरात्मा ने उसे बेचैन कर रखा था। जेल होना उसे अपनी सामाजिक मृत्यु सी लगी थी..!

वो दिन में दो दफे वकील के ऑफिस के चक्कर लगाता..

“साहब..मैं बेगुनाह साबित तो हो जाऊँगा न..?”

“देख भीष्म..मैं समझता हूँ तू बेगुनाह है पर रोज़ रोज़ आ कर सर मत खाया कर..तारीख़ से एक दिन पहले आ जाना..”

“जी..जी..साहब”

भीष्म खुद से कुछ बड़बड़ाता हुआ वापस आ गया।

तारीख़ आ गई।

“बनवारी लाल वर्सेज भीष्म” – आवाज पड़ी।

जज साहब ने ऐनक उतारते हुए कहा-

“जी वकील साहब गवाह…”

“जी हुजुर गवाह आए हुए है..बयान करवा लें..”

“बोलिए…जो कहुँगा धर्म से सच कहुँगा”

जनाब ने शपथ दिलाते हुए कहा..!

“जी सब सच कहुँगा”

गवाह ने कहा।

“स्टेनो साहब..बयान लिखवाओ…

हाँ जी बोलो…क्या जानते हो?”

जज साहब ने पूछा।

“हुजुर, मैं भीष्म का पड़ोसी हूँ..

भीष्म एक नंबर का अवारा और अय्याश है। जुआरी है..कितने ही लोगों का पैसा ऐंठे बैठा है।”

“केस भीष्म के चाल-चलन को लेकर है क्या वकील साहब..?”

भीष्म के वकील ने बनवारी लाल के वकील को टोका।

“चाल-चलन ही ठीक होते तो केस न होता।

खैर..ये बताइए..उर्वशी के साथ भीष्म कब से और कैसे रह रहा था?”

बनवारी लाल के वकील ने गवाह से पूछा।

“जी ये दोनो करीब..5-6 साल से मेरे पड़ोस में रह रहे है।

भीष्म रात को आता है और सुबह होते ही निकल जाता है। एक कमरे का घर था जनाब…अब दो-मंजिला बना लिया है..”

गवाह ने कहा।

“इनके रिश्ते के बारे में बता सकते हो?” बनवारी लाल के वकील ने सवाल किया।

“जनाब..अब और क्या कहुँ..कोई सभ्य रिश्ता तो नही कह सकते इसे”

“आप कुछ पूछना चाहते है?”

भीष्म के वकील से जज साहब ने कहा।

“जी नही हुजुर।”

“वकील साहब ये झूठ बोल रहा है…कुछ तो बोलों आप..”

भीष्म परेशान हो उठा।

“फालतू गवाह है..इससे कुछ साबित नही होता भीष्म..

और हर बात का जवाब देना जरूरी नही..चुप रहो तुम अब”

“जी वकील साहब कोई और गवाह..”

जनाब ने बनवारी लाल के वकील से पूछा।

“जनाब..!!!” भीष्म के वकील ने बीच मे ही कहा..

“जी वकील साहब बोलो..”

“जनाब पुलिस ने भीष्म का मेडिकल नही कराया..आप आदेश दे देते तो..”

“क्यूँ नही कराया एस.आई. साहब..अपने पास भी रखा..कुछ तो कर लेते..अभी कराओ..जाओ..ले जाओ..

ठीक है वकील साहब”

“जी..जी..हुजुर”

भीष्म का वकील बोला।

“हाँ..

उर्वशी की भी गवाही करा लो..वकील साहब”

“जैसे जनाब कहें..”

“जो कहुँगी धर्म से सब सच कहुँगी।” उर्वशी ने शपथ ली।

“भीष्म को कैसे जानती हो?” जनाब ने पूछा।

“जनाब..हमारा लाहौर में घर था..वहाँ ही बनवारी लाल से  हमारी शादी हुई थी। हिंदुस्तान के बँटवारे के बाद हमें लाहौर छोड़ अमृतसर आना था पर लाहौर स्टेशन पर ही हम अपने परिवार से बिछड़ गए।

हम अकेले अगली गाड़ी से अमृतसर आए। 10 दिन तक हुजुर हम वहाँ कैम्प में ही रहे..वहाँ हमारे जैसे लोगों का समंदर था, सभी का कोई न कोई बिछड़ा हुआ था। हमने भी अपने परिवार को ढुँढने की बहुत कोशिश की पर कोई भी न मिला।

एक दिन हमने इन्हे(बनवारी लाल को) हाट में देखा। हम इनके पास गए तो इन्होने हमें छिटक दिया ये कह कर..कि तूझे अब साथ नही रख सकता..तू ज़लील हो चुकी है..वहाँ पाकिस्तान में…जाने कितने मर्दों ने…”

कहते कहते उर्वशी का गला रुंद गया।

“पानी दो इन्हें। उर्वशी…हौंसला रखो..यहाँ कुछ गलत नही होगा। भीष्म तुम्हारा क्या लगता है..ये बताओ”

जनाब ने कहा।

“जी हुजुर।

भीष्म भाई हमारे लिए खुदा का भेजा हुआ कोई फरिश्ता हैं। भीष्म भाई न होते तो शायद हम आज जिंदा न होते।

जब बनवारी लाल ने मुझे छोड़ दिया तो मैं बेचारा महसूस करने लगी। मैं लाहौर से पाक साफ आई थी जनाब पर इन्होने मुझ पर बहुत कीचड़ मल दी। बदचलन, वेश्या..और न जाने क्या क्या कहा। मैं तंग आकर स्यूसाईड करने के लिए पटरी के आगे कूदने जा रही थी।

वहाँ भीष्म भाई ने मुझे रोका।

हौंसला दिया..

मेरे पास सर ढकने को कोई जगह नही थी तो ये मुझे अपने घर ले आए।

पर वहाँ भी लोगों ने बातें बनानी शुरु कर दी तो हम यहाँ सीतापुर आ गए। भीष्म भाई ने मदद की तो थोड़ा काम सीख लिया।

उनकी मदद से ही अब छोटा सा बिजनेस शुरू किया। जब सब बस हमें लूटने की ही सोच रहे थे तब भीष्म भाई ने हमारी मदद की। इसमे उनका तो कोई स्वार्थ नही था…भाई मे हमने हमेशा अपने पिता को देखा है।

जब अब हम थोड़ा कमाने लगे है तो ये हमारी कमाई ऐंठना चाहते है इसलिए ये झूठा मुकदमा किया है”

“बनवारी लाल..तुम इसे साथ नहीं रखना चाहते?”

जज साहब ने कहा।

“जनाब इस सवाल की इस केस में क्या जरूरत है?”

बनवारी लाल के वकील ने कहा।

“अरे वकील साहब..थोड़ा बहुत तो हम भी पढ़ लिख के ही बैठें है यहाँ..पूछ लेने दो..

हाँ बनवारी लाल..रखना चाहते हो इसे??”

“न..नहीं जनाब..ये..इसे अपने साथ नही रखुंगा..

ये कैरेक्टर लेस औरत है..पागल हो चुकी है..अपने परिवार की बजाय उस कमीन का साथ दे रही है”

बनवारी लाल ने कहा।

“हम्म..आगे वकील साहब परसो सुनते है इसे..रिपोर्ट भी आ लेगी तब तक..ठीक

और हाँ थोड़ा सीखा दिया करो वकील साहब कि कैसे बोलना होता है..कोर्ट के सामने तो गाली न निकाला करे कम से कम”

जनाब ने अगली तारीख लगा दी।

भीष्म आज कुछ ज्यादा मायूस हो गया। उसे लगा मानो उसके माथे पर, जो हमेशा हौंसले का परचम था, एक धब्बा लग जाएगा।

वो दिन में दो बार बेहोश हुआ..उसे ग्लुकोज़ चढ़ाया गया।

वो नींद में भी बदहवास सा चिल्ला उठता..

“मैं बेगुनाह हूँ..

जनाब, मैं बेगुनाह हूँ..”

और फिर जोर जोर से रोने लगता। उर्वशी जब भी उसे समझाने को आगे बढ़ती..वो दूर से ही हाथ जोड़ उसे बाहर जाने कह देता।

दिन गुजर गया।

 

कचहरी में तारीख पड़ गई।

“जनाब..मेडिकल रिपोर्ट आ गई है..भीष्म इंपोटेंट है..ही कैन नॉट इंडल्ज इन सेक्सुअल इंटरकोर्स..

केस खत्म है जनाब”

भीष्म के वकील ने कहा।

“हुजुर..भीष्म शादीशुदा था, बँटवारे के वक्त हुई हिंसा में अपनी पत्नी के मरने के बाद से ही ये उर्वशी के साथ रह रहा था। ये रिपोर्ट उसकी नामर्दान्गी की तस्दीक नही करती।”

बनवारी लाल के वकील ने उत्तेजित होते हुए कहा।

“अहलमद साहब को बोल कर कादंबिनी सहाय  की फाईल निकलवाना जरा..” जज साहब ने नायाब कोर्ट से कहा।

“हाँ आप बोलते रहिए वकील साहब..सुन रहा हूँ मैं”

भीष्म..कादंबिनी का नाम सुन भौच्चका रह गया।

“हुजुर टेस्ट दोबारा कराने की अर्जी है..बस..

सारे हालात भी वैसे भीष्म के खिलाफ ही है”

“ठीक है वकील साहब..चार बजे ऑडर के लिए आ जाओ”

जनाब ने कहा।

“भीष्म तुम रुको”

“ह्म्म…भीष्म सहाय नाम है तुम्हारा ?”

“जी..जी हुजुर”

“कादंबिनि सहाय तुम्हारी पत्नी थी..??”

भीष्म की आँखे चौढ़ी हो गई…

“जी..जनाब..”

भीष्म ने हिचकते हुए कहा।

“तुम उसके केस में कचहरी क्यूँ नही आए..?

उसके अपराधियों को मैने हाल ही में सजा दी है..”

भीष्म सांत्वना के आँसूओं से भर गया।

“भीष्म..तुम भी तो पीड़ित थे उस केस में..”

“जी जनाब..ये चोट तब की ही है..”

भीष्म ने कुर्ता ऊपर करते हुए कहा।

“तुम आते तो उन्हें और सजा हो सकती थी, और तुम्हे भी मुआवजा मिल जाता”

“मुआवजे का मैं क्या करता जनाब,

मुआवजे से मेरी कादंबिनी तो वापस नही आती….”

भीष्म की आत्मा ने चीख भरी।

“मै उसे बचा न सका..उन दरिंदो ने मेरे सामने ही मेरी कादंबिनी को…वो चीखती रही..चिल्लाती रही..मैं..मैं कुछ न कर सका…मर ही जाता तो अच्छा होता…”

“हम्मम…भीष्म…हौंसला रखों..जाओ चार बजे आ जाना”

जनाब ने कहा।

कादंबिनी को मिले इंसाफ की खबर सुन, भीष्म कहीं खो सा गया। उसने बटुए से कादंबिनी और अपनी तस्वीर निकाली और देर तक देखता रहा| उसे याद हो आया कि हादसे से पहले वो कैसे पार्क में एक दूसरे का हाथ थामें बैठे थे। हँसी-मजाक की बातों में बच्चों के नाम भी तय कर लिए थे..! इतना सुंदर सपना बुना था दोनों ने…कोई बेवजह ही क्यूं तोड़ गया..!

भीष्म की आँखों में आँसू तैर गए। उसने खुद को संभाला।

“कादंबिनी के साथ जो हुआ वो उर्वशी के साथ न हो…उर्वशी मासूम सी बच्ची है….मेरे चक्कर में क्या क्या सह रही है..

या खुदा..मदद करना उसकी..खुश रखना उसे”

भीष्म ने मन में ही दुआ माँगी।

चार बज गए।

उर्वशी, बनवारी लाल और भीष्म तीनों कचहरी में दाखिल हुए। उर्वशी मन ही मन कुछ कुछ बुदबुदा रही थी..प्रार्थना कर रही थी..भीष्म चित्त-मन-शरीर से मौन था..

जनाब ने फैसला सुनाना शुरु किया-

“मर्दन करना…किसी को दुख देना, पीड़ा देना, क्षत-विक्षत कर देने को हिंदी भाषा में मर्दन करना कहा जाता हैं। इसमे से अगर ‘न’ हटा दिया जाए अर्थात किसी को दुख न देना, पीड़ा न होने देना ही..मर्द कहलाया जाना चाहिए।

सामाजिक परिभाषा हालांकि आपकी व्यक्तिगत राय को महत्तव नही देती। समाज के लिए मर्द का मतलब क्या हो ये समाज खुद तय करें।

इस केस की बाबत- मेडिकल रिपोर्ट से ये साफ है कि भीष्म इंपोटेंट यानि नामर्द हैं। और कादंबिनी सहाय का केस ये साबित करता है कि ये इंपोटेंसी उर्वशी से मिलने से पहले से ही है।

इन सभी सबुतो को मद्देनज़र रखते हुए..ये कोर्ट भीष्म को बाइज्जत बरी करती है और बनवारी लाल पर झुठा केस करने के लिए 25000 का जुर्माना लगाती है।”

“बहुत शुक्रिया हुजुर…बहुत बहुत शुक्रिया…”

भीष्म आँखे पोंछता हुआ कोर्ट से बाहर निकला।

“भीष्म भाई…”

उर्वशी ने आँसूओं से परिरुद्ध गले से आवाज़ भरी…

आँसू भरी आँखे लिए उर्वशी, भीष्म की आँखे पोंछने को आगे बढ़ी।

भीष्म ने इस बार आगे बढ़ कर उर्वशी को गले लगा लिया।

“बस अब चुप कर पगली…ऑफिस का काम छोड़ यहाँ लगी पड़ी है..चल ऑफिस चल..”

भीष्म ने स्वावलंबी साँस भर कहा।

“कृष्णा वर्सेज हैदर”

नायाब कोर्ट ने आवाज लगाई।

समाप्त


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6 Comments Add yours

  1. Pehla prayas behad sukhad raha Nitish. Court scenes hamesha se fascinate karte aaye hain, phir chahe wo movies ho ya kahaniyan. Maza aa gaya padhkar.

    Samajik mrityu aur mard ki paribhasha ne kahani ka wajan bahut badha diya.

    Keep it up!!

  2. mohdkausenm says:

    सामाजिक परिभाषा हालांकि आपकी व्यक्तिगत राय को महत्तव नही देती। समाज के लिए मर्द का मतलब क्या हो ये समाज खुद तय करें।

  3. shikha says:

    Bahut khoob likhi hai kahaani
    Kya kahe padh kar ise, hai pareshani
    Kuch toh kahe, dil kare mann-mani
    Shabado ke kajaane mai utar kar
    Sajaai Hui kahaani.. hai badi suhaani..

    Keep it up..!!

    1. Thank you so much shikha for making time to read it. Appreciate your style of your appreciation. :))

  4. Going through this story was a totally different experience for me …bheeshm character has been beautiful portrayed ..rather I would say you have done justification with the title “Paurush” .
    Keep writing ..

    1. Thank you so much.
      I hope the story kept you enamored. :))

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