Best Of Swalekh : June 4

स्वलेख : जून 4, 2017 मार्गदर्शक : अर्चना अग्रवाल विषय : दोपहर  चयनित रचनाएं 1 दोपहर का वो वक्त  जब माँ सो जाया करती थी तब सभी बच्चों की टोली आम तोड़ने जाया करती थी माँ कोशिश तो करती थी खूब मुझे सुलाने की आँचल पानी में भिगोती थी और ओढ़ा देती थी मै शैतान…

Best Of Swalekh : May 14

स्वलेख : मई 14, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल विषय : माँ  चयनित रचनाएं 1 बेवज़ह हँसना और खिलखिलाना चाहती हूँ ए माँ, मैं फिर बच्चा बन जाना चाहती हूँ अपनी फ्रॉक को पकड़ गोल – गोल घूमना चाहती हूँ ए माँ मैं फिर बच्चा बन जाना चाहती हूँ जीवन के सूनेपन को भूल ज़ोर से…

Best Of Swalekh : May 21

स्वलेख : मई २१, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल विषय : दिल चयनित रचनाएं 1 दिल का चोखा सौदा ले कर बाज़ारों में जाए कौन सिक्कों के सौदागर हैं सब, दिल का मोल लगाए कौन मेरी बात नहीं सुनता है, दुनिया से उलझा करता है अब खुद से ही रूठ गया है, इस दिल को बहलाये…

Review : White Shirt : Anamika Purohit

फ़िल्म – वाइट शर्ट  लेखक एवं निर्देशक – सुमित अरोड़ा मुख्य कलाकार – कृतिका कामरा (वाणी); कुणाल कपूर (अविक)    भिन्न वस्तुओं या विचारों में समानता बैठाना सरल नहीं; पर यदि ये अनैलॉजी बैठ जाए तो लेखन का ज़ायक़ा बढ़ जाता है। सफ़ेद क़मीज़ और एक रूमानी रिश्ते के बीच ऐसी-ही समानता बैठाई है, लेखक सुमित अरोड़ा…

Aham : Renu Mishra

जेठ की दोपहर जब सारा बाजार सुनसान होता है ,तब भी मेवालाल की दुकान खाली नहीं रहती। गाँव की इकलौती पंसारी की दुकान है । भीड़  होना लाजमी है। आज भी लोगों का हुजूम लगा था। सामान तौलते हुए मेवालाल ने सामने सड़क पर नजर फेरी तो देखा रमेश स्कूल से पढ़ा कर घर लौट…

Closing Notes : Paurush

  छह दिन और आठ कहानियों का ये सफ़र बहुत रचनात्मक और मनोरंजक रहा .. जहाँ एक तरफ कथानक और भावनाओं की अभिव्यक्ति ने पाठकों का दिल जीता, तो कहीं कहीं पर कुछ आलोचना भी लेखकों के हिस्से आयी|कुछ कहानियों ने हमारे अंतर मन को स्पर्श किया और हम उन के साथ एक जुड़ाव महसूस…

Devvrat : Sushil Kumar

लाजवंती जब जेल पहुंची तो थानेदार उसे देख कर परेशान हो गया .. “लाजवंती जी, आप फिर आ गयी।” “एक बार और कोशिश कर के देख लीजिये न.. शायद वो इस बार मिलना चाहें। उन्हें बहुत कुछ ज़रुरी बताना है।” “पांडे, कैदी ६७० को ले कर आओ ” थानेदार ने लाजवंती का मन रखने के…

Karan : Navneet Mishra

भाग-1 ****** चातक चाँद को देखकर जैसे खुश होता है करन उससे भी अधिक खुश था। नए कपड़ों और गहनों से सजी उसकी दुल्हन उसकी प्रतीक्षा में बैठी थी। इस वातावरण में मुग्ध अनायास ही कब उसका मन बच्चे की भाँति मचल उठा, उसे स्वयं भी भान नहीं हुआ। नयी अनुभूति से अभिभूत स्वयं को…

Rannchhod : Anshu Bhatia

आसपास से आती हुई आवाज़ें रणछोड़  के कानों में पड़ रहीं थीं| चेहरे पर पड़ती हुई तेज़ धूप से उसकी आँख खुली| कुछ औरतों ने उसे घेर रखा था| उसके आँखें खोलते ही सभी चार क़दम पीछे हो लीं| उसने चारों ओर नज़रें दौड़ा कर देखा….ये पेड़…ये नदी….ये लोग….सब कुछ उसे अजनबी सा लगा| कुछ…

Bheeshma : Nitish Kaushik

सुबह के 10 बजने ही वाले थे, कचहरी में बहुत भीड़ जमा हो चुकी थी। भीष्म कलेजा मुँह में लिए,9 बजे से ही कचहरी के बाहर खड़ा था। 10 बज गए..भीष्म की धड़कने घड़ी की टिक-टिक को पछाड़ रही थी। जज साहब ने 10:30 बजे सीट ली। “बनवारी लाल वर्सेज भीष्म” नायाब-कोर्ट ने आवाज लगाई,…

Paarth : Ritu Dixit

“पार्थ, पार्थ, कहाँ हो तुम?” मेजर कृष्णा ने कड़कती हुई आवाज़ में घर में क़दम रखते ही पूछा तो पार्थ क्या, घर की सारी खिड़कियाँ-किवाड़ें काँप गयी एक बार तो। सिर झुकाये एक हृष्ट-पुष्ट जवान २०-२२ साल का पार्थ जब कमरे में आया तो उसे देखकर मेजर साहब और ज़्यादा भड़क गए। “ऐसे कैसे मार…

Srikand : Preet Kamal

सुबह से घर में हलचल है, नए बरतन निकाले जा रहे।हैं, घर को चकाचक चमकाया जा रहा है, रसोई में युद्ध-स्तर पर तैयारी अभी से शुरू है। आखिर कल मुझे देखने लड़की वाले जो आ रहे हैं, वो भी दीदी के ससुराल वालों की ओर से! कमी कैसे छोड़ी जा सकती है खातिरदारी में..! लेकिन…

Durjoy : Mohammed Kausen

“चल मीना अब तेरा नंबर है अच्छे से नाप देना।” सपना ने पास खड़ी मीना को हाथ से खींच कर दर्ज़ी के सामने खड़े करते हुए कहा। “और हाँ चाचा इसका नाप थोड़ा टाइट रखना।” ठीक है बेटा दर्ज़ी चाचा ने अपनी ऐनक सही करते हुए कहा। “पर दीदी टाइट चोली में दम घुटता है।”…

Suyodhan : Joy Banerjee

दिसम्बर का आखिरी हफ्ता शुरू हो चुका था। समय एक साल और बूढ़ा हो गया.. पर मौसम का मिज़ाज़ अबकी कुछ अलग ही था,कंफ्यूज सा, बिल्कुल मेरे जैसा। वरना शिमला में अब तक तो अच्छी खासी बर्फ पड़ चुकी होती है। शिमला में मेरा पांचवा साल है। चार साल पहले एक टीचर बन के मैं…

Kahani Sankalan : Paurush

भूमिका : नारी सदा से ही साहित्य सृजन की केन्द्र बिन्दु रही है , इसकी चाल – ढाल , हाव – भाव यहाँ तक कि नख-शिख वर्णन में भी साहित्यकारों की विशेष रुचि रही है । सौंदर्य मर्मज्ञ ये रचनाकार नारी को ही इतिवृत्त मान कर पुरुष को नितांत उपेक्षित करते रहे हैं या यूँ…