Best Of Swalekh : May 14

स्वलेख : मई 14, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल विषय : माँ  चयनित रचनाएं 1 बेवज़ह हँसना और खिलखिलाना चाहती हूँ ए माँ, मैं फिर बच्चा बन जाना चाहती हूँ अपनी फ्रॉक को पकड़ गोल – गोल घूमना चाहती हूँ ए माँ मैं फिर बच्चा बन जाना चाहती हूँ जीवन के सूनेपन को भूल ज़ोर से…

Rannchhod : Anshu Bhatia

आसपास से आती हुई आवाज़ें रणछोड़  के कानों में पड़ रहीं थीं| चेहरे पर पड़ती हुई तेज़ धूप से उसकी आँख खुली| कुछ औरतों ने उसे घेर रखा था| उसके आँखें खोलते ही सभी चार क़दम पीछे हो लीं| उसने चारों ओर नज़रें दौड़ा कर देखा….ये पेड़…ये नदी….ये लोग….सब कुछ उसे अजनबी सा लगा| कुछ…

Antarnaad : Anshu Bhatia

खिड़की से आते हुए भीने-भीने हवा के झोंके बिनोद के चेहरे पर से उसके बालों को उड़ा रहे थे| वो हवा के मज़े कम ले रहा था, अपने नाखून ज़्यादा चबा रहा था| बस रुक गयी और बस-कंडक्टर ने उसे घूरा व नीचे उतरने का इशारा किया| उसके नाखून चबाने की गति लगभग दोगुनी हो…

Baat Ek Raat Ki : Anshu Bhatia

चलती हुई ट्रेन की खिड़की से बाहर झांकना निलेश को हमेशा से बहुत पसंद था…आगे बढ़ने के साथ-साथ पीछे जाते हुए पेड़-पौधे देख उसका मन प्रफ्फुलित हो उठता| बाहर से आती हुई ठंडी हवा और कानों में गूंजता हुआ मधुर संगीत…अहा!! अपने ख्यालों में खोया हुआ निलेश एक अलग ही दुनिया की सैर कर रहा…

Kahaani : Seeta : Anshu Bhatia

“बिटिया सोने से पहले फूल बिस्तर पर से नीचे गिरा देना, वर्ना तुम्हारे प्यार की पूरी कहानी सुबह चादर पर उकेरी नज़र आएगी!!” दुल्हन को कमरे में भेजती हुई चाची बोली। सीता खंभे के पीछे खड़ी कनखियों से पुष्पा को मोहन के कमरे में जाते हुए देख रही थी। पुष्पा के चेहरे पर उभरती हुई…

दीर्घ कथा संकलन : Feb 2017

परिणाम कहानियाँ लेखक की रचनात्मकता एवं कल्पनाशीलता को प्रतिबिम्बित करती हैं। कहानी मे कथानक की नवीनता अनिवार्य अंग है जिसे शब्द, संवाद एवं लेखन शैली के सुंदर तानेबाने में सँजो कर इस रूप में पाठक के समक्ष प्रस्तुत करना होता है कि उसका पढ़ने का कौतूहल हर वाक्य के साथ बढ़ता चला जाए। यही एक कथा की…

Tasveer : Anshu Bhatia

Kahani Suhani : Selected Stories : Third Winner तस्वीर लेखिका : अंशु भाटिया  चंदर फूलों का बेहद शौक़ीन था| सुबह घूमने के लिए उसने दरिया किनारे की बजाय अल्फ्रेड पार्क चुना था क्योंकि पानी की लहरों की बजाय उसे फूलों के बाग़ के रंग और सौरभ की लहरों से बेहद प्यार था| और उसे दूसरा…