Best of Sukhan : March 5, 2017

Mehfil-e-Sukhan : March 5, 2017 Mentor : Koshish Ghazal Selected Two Ghazals Best of Swalekh – Entry #1 Writer : Supriya @SacredHeartSip ज़िन्दगी को मेरी मुझको ज़िन्दगी की आदत है शिक़वा, ग़िला न मुहब्बत, फ़क़त रवायत है एक शाम थी जो ताकती थी कभी राह मेरी कुछ दिनों से उसने भी करी मुझसे बगावत है…

Poetry In Translation : Ghalib : by Koshish Ghazal

उर्दू ऐसी ज़बान है कि मियाँ जितनी आती है कम आती है .. तो आइये आज सिरहाने महफ़िल में .. हमारे मेंटर, कोशिश ग़ज़ल जी  के साथ शायरी की दुनिया के मुश्किल लफ़्ज़ों को समझ कर इस मशहूर ग़ज़ल के गहरे मायने उकेरें .. TRANSLATION SUMMARY OF WORDS MEET THE MENTOR