Bheeshma : Nitish Kaushik

सुबह के 10 बजने ही वाले थे, कचहरी में बहुत भीड़ जमा हो चुकी थी। भीष्म कलेजा मुँह में लिए,9 बजे से ही कचहरी के बाहर खड़ा था। 10 बज गए..भीष्म की धड़कने घड़ी की टिक-टिक को पछाड़ रही थी। जज साहब ने 10:30 बजे सीट ली। “बनवारी लाल वर्सेज भीष्म” नायाब-कोर्ट ने आवाज लगाई,…

Best Of Swalekh : April 28

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]