Best Of Swalekh : June 4

स्वलेख : जून 4, 2017 मार्गदर्शक : अर्चना अग्रवाल विषय : दोपहर  चयनित रचनाएं 1 दोपहर का वो वक्त  जब माँ सो जाया करती थी तब सभी बच्चों की टोली आम तोड़ने जाया करती थी माँ कोशिश तो करती थी खूब मुझे सुलाने की आँचल पानी में भिगोती थी और ओढ़ा देती थी मै शैतान…

Srikand : Preet Kamal

सुबह से घर में हलचल है, नए बरतन निकाले जा रहे।हैं, घर को चकाचक चमकाया जा रहा है, रसोई में युद्ध-स्तर पर तैयारी अभी से शुरू है। आखिर कल मुझे देखने लड़की वाले जो आ रहे हैं, वो भी दीदी के ससुराल वालों की ओर से! कमी कैसे छोड़ी जा सकती है खातिरदारी में..! लेकिन…

Best Of Swalekh : April 28

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]

Best Of Swalekh : April 21

स्वलेख : April 16, 2017 मार्गदर्शक : कोशिश ग़ज़ल  विषय : मोड़  चयनित रचनाएं  @shikhasaxena191 हर सुबह वहीं से नही आती जिस मोड़ से कल गई थी रात को काफी वक्त मिलता है, रास्ते बदलने के लिए @JoyBanny19 कहाँ दफ़नाता तिरी ग़लतियों को मेरे मसीहा, हर मोड़ पे पत्थर लिए ख़ुदा मिला। @RawatWrites न जाने […]

Birha Da Sultaan : Translation : Preet Kamal

पोएट्री इन ट्रांसलेशन  सेगमेंट में आपका फिर से स्वागत है। आइये, आज चलते हैं सोहने पंजाब की ओर.. और प्रीत कमल के साथ पंजाबी साहित्य और कविताओं के गूढ़ अर्थ समझने की कोशिश करते हैं .. आज शिव कुमार बटालवी द्वारा लिखित कविता “बिरहा दा सुल्तान” पर एक नज़र..  

Suryakant Tripathi Nirala : Archana Aggarwal

पोएट्री इन ट्रांसलेशन  सेगमेंट में आपका फिर से स्वागत है। आइये, हम अर्चना अग्रवाल के साथ साहित्य और कविताओं के गूढ़ अर्थ समझें .. आज सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता :  भिक्षुक  : पर एक प्रकाश  भिक्षुक  MEET THE MENTOR

Kahaani : Paarthvi : Preet Kamal

  “अरे रोहन!  ठीक से लगा ये तोरण, बिल्कुल पीले फूलों के साथ, दरवाज़े के ऊपर.. पार्था माँ को ऐसे ही पसंद है। और मीता! कितनी देर लगाएगी रंगोली बनाने में, पार्था माँ आती ही होंगीं।”   सुमित सभी को निर्देश दे रहा था।  देता भी क्यों ना… उनकी ‘पार्था माँ’  का जन्मदिन था आज!…

Poetry In Translation : Ghalib : by Koshish Ghazal

उर्दू ऐसी ज़बान है कि मियाँ जितनी आती है कम आती है .. तो आइये आज सिरहाने महफ़िल में .. हमारे मेंटर, कोशिश ग़ज़ल जी  के साथ शायरी की दुनिया के मुश्किल लफ़्ज़ों को समझ कर इस मशहूर ग़ज़ल के गहरे मायने उकेरें .. TRANSLATION SUMMARY OF WORDS MEET THE MENTOR