Ziddi Yaadein .. By Siddhant

Siddhant reads his own poetry, ‘Ziddi Yaadein’ with his baritone painting the dusk and dampness of a lonely evening’s rainfall.

Week 12: Zindagi, inki bhi ..

Dear readers .. We have worked really hard to put these stories on the tab for you. If you like a story, mention a few words of encouragement to the writer and tag us. Spread some love. 🙂   विज्ञापन by Mohammad Rizwan @Rizwan1149 {Appreciated By Guest Editor} अशोक मित्तल, शहर में बन रही एक…

थोड़ा डर रहने दो.. A poem by Siddhant

A beautiful ‘nazm’.. Although it needs slight polishing, I liked the style, the graph and the lesson.Wonderfully put together.Reminds me of numerous conversations with my self. Anuradha Title : थोड़ा डर रहने दो.. Written By : Siddhant  @Siddhant01 This poetry is about believing in self and decisions we make in life. बड़ी दूर है उसका घर,…

Week 9 : Shades Of Love

  तुम्हारे साथ By Siddhant @siddhant01 – अरे ! तुम फिर आ गईं…. – तुम उदास थे, कैसे ना आती ? – तुम्हें अगर मेरे साथ ही रहना है, तो दूर ही क्यों जाती हो? – लेकिन मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ ही रहती हूँ । – मेरे साथ? – मुझे पहचाना नहीं ? –…

Week 8 : यह गुलसिताँ हमारा

{Note From Guest Editor @kuhu_bole : “Class of 2016, इस बार शानदार कहानियां मिली हैं। कहा था ना हिंदुस्तान में जितने रंग है उतनी कहानियां मिल सकती हैं। शब्दों की सीमा में रहकर बहुत अच्छी कहानियां लिखी गई हैं। इनमें से कोई एक कहानी चुनना बहुत ही मुश्किल लगा।” } एक सड़क By Varun K….

Week 07: A Salute To Army Women

Note From Guest Editor Narpati Chandra Pareek : आज  सिरहाने द्वारा मुझे 10 कहानियाँ पढ़ने के लिए दी गई,आग्रह था कि एक दिन में इन्हें पढ़ कर किसी एक को सर्वश्रेष्ठ घोषित करूँ !अधिकांश लघु कहानियाँ उच्च कोटि की प्रतीत हुई ! श्रेष्ठ कहानी के चयन के लिए मैंने कहानी-समालोचना की परंपरागत कसौटी को अपनाने…

‘ऐ पिंक डेट’ By Siddhant & Kush

जोड़ी नंबर 4 : Siddhant & Kush कहानी : पिंक डेट “सिर्फ गुलाब लेने हो तो कुछ कम करोगे?” “साहब ये गुलाब के ही पैसे है, कांटे तो कॉंप्लिमेंट्री है !!” बेचारा गुलाब भी समझ गया की बन्दा गुजराती है | जिग्नेश पटेल उर्फ जिग्गु जी के कपड़ो से ये समझना मुश्किल था की वो…

Week 6 : बड़ा दिन, छोटा सांता

A Special Message From Gayatri, Our Guest Editor of the Week (@gayatriim) विवेक की संजीता तस्वीर खुद में एक कहानी कहती है – एक रेल का डब्बा या यूं कहिए भारतीय समाज के मध्यवर्गीय नागरिकों की लाइफलाईन स्लीपर क्लास का डब्बा और लोहे की सलाखों वाली खिड़की से बाहर झांकती नन्हे सांता की मासूम आंखें,…

Week 4: Kaagaz

    कागज़ का रिश्ता By Ajay Purohit  @Ajaythetwit “माँ, नाव कहाँ चली जाती है” “बिट्टो रानी, कागज़ की है, डूब जाती होगी” “रानी साहिबा, कोई पगला है, कई सालों से इन कागज़ी नावों को पकड़, जमा करता था । कहता था, बिटिया की हैं । बेचारे की बेटी बाढ़ में बह गयी थी” “पिछले महीने…

Week 3: Sugar Free

लड्डू by Siddhant @Siddhant01 – अरे! आपने अब तक दवाई नहीं ली? जन्मदिन के दिन भी उदास हो, आज तो हँस दीजिये। – कैसे हँसू , तुम ही कहो? ना मिठाई, ना केक और ना तुमने मुझे मुन्नी की टॉफी खाने दी। – आप समझते क्यूँ नहीं? ये मीठा आपके लिए ठीक नहीं। – अच्छा…